नालन्दा विश्वविद्यालय में “भारत–वियतनाम बौद्ध विरासत” पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन..

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@ख़बरें Tv: राजगीर, नालन्दा (10 अक्टूबर 2025): नालन्दा विश्वविद्यालय, राजगीर में “भारत–वियतनाम बौद्ध विरासत: विगत और भविष्य”विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है। यह सम्मेलन नालन्दा विश्वविद्यालय द्वारा बुद्धिस्ट वीमेन रिसर्च सेण्टर और वियतनाम बुद्धिस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत, वियतनाम और अन्य देशों से आए विद्वान, शोधकर्ता, भिक्षु और प्रतिनिधि बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। यह नालन्दा विश्वविद्यालय द्वारा एक महीने के भीतर आयोजित किया गया दूसरा प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन है, इससे पूर्व सितंबर 2025 में विश्वविद्यालय ने ईस्ट एशिया समिट फॉर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस की सफल मेजबानी की थी।
विश्विदयालय के सुषमा स्वराज ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मलेन के उद्घाटन सत्र में सभी अतिथियों, प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सम्मलेन के पहले दिन के दौरान बौद्ध विरासत की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श हुआ, जिसमें यह रेखांकित किया गया कि कैसे यह विरासत संवाद, विद्वता और पारस्परिक समझ को गहराई देती है। ऐसे आयोजन से ये स्पष्ट है कि नालन्दा विश्वविद्यालय हमेशा से ज्ञान, शांति और करुणा के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक शिक्षा और संस्कृति के संवाद का मंच बनने की दिशा में काम कर रहा है।
दो दिनों तक चलने वाले इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बौद्ध विरासत, सांस्कृतिक कूटनीति, शांति स्थापना और आधुनिक समाज में बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत किए जायेंगे। इन चर्चाओं का उद्देश्य शोध सहयोग को प्रोत्साहित करना और भारत तथा वियतनाम के बीच बौद्ध धर्म से जुड़ी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक कड़ियों को और सुदृढ़ बनाना है।
नालन्दा विश्वविद्यालय इन संवादों और ऐसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के माध्यम से अपनी पुरानी विरासत को एक जीवंत रूप दे रहा है, एक ऐसा वातावरण, जहाँ आपसी समझ और साझा सीख के फूल खिलते हैं। यही वह कड़ी है जो हमारे गौरवशाली अतीत को वर्तमान विश्व की उज्जवल संभावनाओं से जोड़कर एक बेहतर कल का निर्माण करने में सहयोगी साबित होगी।
