नालंदा विश्वविद्यालय में ‘नालंदा शोध विहार’ का उद्घाटन…
चांसलर प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने किया उद्घाटन; विद्यार्थियों से कहा-अपनी पसंद के विषय में पूरी लगन से आगे बढ़ें और उत्कृष्टता हासिल करें…

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार | 10 अगस्त 2026, सोमवार: नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने आज विश्वविद्यालय परिसर में ‘नालंदा शोध विहार’ का उद्घाटन किया। यह नया साझा शोध परिसर विश्वविद्यालय के सभी केंद्रों को एक ही स्थान पर जोड़ने का काम करेगा। वर्तमान में विश्वविद्यालय में कुल 6 केंद्र संचालित हैं, जिन्हें अब इस शोध विहार के तहत एक साथ लाया गया है। इस पहल से अनुसंधान, नीतिगत अध्ययनों और अंतर-विषयक सहयोग को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
उद्घाटन के बाद विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागार में विशेष व्याख्यान एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं संस्थागत गतिविधियों, भविष्य की योजनाओं और प्रमुख पहलों की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने संस्थागत डेटाबेस को सुदृढ़ करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों को बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया।
तत्पश्चात चांसलर प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया ने अपने विशेष संबोधन में अध्यापन और अनुसंधान के परस्पर तालमेल पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षण और शोध एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं और दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपनी पसंद के विषय का चयन कर पूरी लगन से उसमें विशेषज्ञता हासिल करें और निरंतर प्रयास के माध्यम से उत्कृष्टता की ओर बढ़ें।
उन्होंने कम समय में नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय में शिक्षकों और विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के लिए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी के प्रयासों की भी प्रशंसा की। प्रोफेसर पनगढ़िया ने विश्वविद्यालय की ‘सहभागिता’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज और आसपास के समुदायों से जुड़कर काम करना विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान उन्हें चांसलर से सीधे सवाल पूछने, अपने विचार साझा करने और विभिन्न विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिला। यह संवाद सवाल पूछने, विचारों का आदान-प्रदान करने और सीखने की उस परंपरा को दर्शाता है, जो नालंदा की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) श्री रुद्रेंद्र टंडन ने नालंदा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अंतरराष्ट्रीय और संस्थागत गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मंत्रालय के निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।
नालंदा–लोक भवन व्याख्यान श्रृंखला और उच्चस्तरीय बैठक
इससे एक दिन पहले, 9 अगस्त 2026 को बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में नालंदा विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक विकास को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई।
बैठक में विश्वविद्यालय की बेहतर कनेक्टिविटी, नालंदा–राजगीर नॉलेज एंड इनोवेशन कैंपस के विकास, बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने और नालंदा की समृद्ध बौद्धिक एवं सभ्यतागत विरासत को आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में नालंदा विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर ज्ञान, नवाचार और उच्च शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत करने से जुड़े विभिन्न प्रयासों की भी समीक्षा की गई। बैठक में चांसलर, बिहार सरकार के मुख्य सचिव, विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट), नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति तथा भारत सरकार, बिहार सरकार और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के बाद नालंदा–लोक भवन व्याख्यान श्रृंखला के तहत प्रो. अरविंद पनगढ़िया ने ‘राज्य के नेतृत्व में बदलाव: भारत के राज्यों में शहरीकरण, रोजगार और सुधार का एजेंडा’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में राज्यों की भूमिका, शहरीकरण, रोजगार के अवसर बढ़ाने, बेहतर प्रशासन, वित्तीय अनुशासन और कारोबार को आसान बनाने के लिए जरूरी सुधारों के महत्व पर विचार साझा किए।
