तीन दिवसीय लोक नाट्य महोत्सव “पटरंगम 2026 – पटना रंग महोत्सव” का हुआ समापन….

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#ख़बरें Tv: पटना, 25 जुलाई कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सौजन्य से तथा विश्वा, पटना (वाईटल इन्वेंशन औफ सोशल हार मोनी विथ आर्ट) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय लोक नाट्य महोत्सव “पटरंगम 2026 – पटना रंग महोत्सव” का आज प्रेमचंद रंगशाला, राजेन्द्र नगर, पटना में सफलतापूर्वक समापन हुआ।
विगत 12 वर्षों से बिहार में रंगकर्म, लोककला और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक चेतना के प्रसार में सक्रिय विश्वा, पटना द्वारा आयोजित इस महोत्सव के अंतिम दिन भी रंगप्रेमियों का उत्साह देखने योग्य रहा।
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि, रंगकर्मी, साहित्यकार, कलाकार एवं बड़ी संख्या में कला-प्रेमी दर्शकों ने समारोह में सहभागिता की। अतिथियों ने रंगमंच को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बताते हुए ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया।
शाम 5:30 बजे आयोजित नुक्कड़ नाटक सत्र में नाद, पटना द्वारा “तुमका का बताएं भईया” का मंचन किया गया। नाटक के लेखक अभिषेक चौहान एवं निर्देशक मो. जानी हैं। सामाजिक समस्याओं पर आधारित इस प्रस्तुति में आम जनजीवन की विडंबनाओं, सामाजिक विसंगतियों और बदलते परिवेश की चुनौतियों को व्यंग्य और सहज संवादों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर गंभीरता से सोचने के लिए भी प्रेरित किया।
इसके उपरांत शाम 6:30 बजे इमैजिनेशन, बिहार द्वारा मुंशी प्रेमचंद लिखित कालजयी नाटक “प्रेम की वेदी” का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन युवा रंगकर्मी सत्यम कुमार सिंह ने किया। प्रेमचंद की इस क्लासिक कृति को समकालीन सामाजिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत करते हुए निर्देशक ने जातिवाद, दहेज प्रथा, बेमेल विवाह और तथाकथित पारिवारिक प्रतिष्ठा जैसी कुरीतियों पर प्रभावशाली प्रश्न खड़े किए।
नाटक की कहानी दो युवा प्रेमियों के निष्कलुष प्रेम और रूढ़िवादी सामाजिक व्यवस्था के बीच संघर्ष को केंद्र में रखती है। प्रेमी युगल अपने रिश्ते को बचाने का हर संभव प्रयास करता है, लेकिन जातिगत भेदभाव, दहेज और सामाजिक बंधनों के कारण उनका प्रेम कठोर सामाजिक व्यवस्था की भेंट चढ़ने लगता है। प्रस्तुति यह संदेश देती है कि समाज की झूठी मर्यादाओं और कुप्रथाओं के कारण आज भी अनेक निर्दोष जीवन प्रभावित हो रहे हैं। निर्देशक सत्यम कुमार सिंह ने इस नाटक को वर्तमान समय की ऑनर किलिंग, जातीय भेदभाव और सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं से जोड़कर इसे और अधिक प्रासंगिक बना दिया।
मंच पर सत्यम कुमार सिंह (योगराज), जानवी सोनी (जेनी), रितिका उपाध्याय (मिस गार्डेन), पीयूष ओझा (डॉक्टर), अभीरथ सोनू (विलियम), सुमित कुमार (पोस्टमास्टर), रूपाली (चंपा) एवं खुशी (उमा) ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की। वहीं नेपथ्य में रौशन कुमार की प्रकाश परिकल्पना, सुनील विश्वकर्मा, प्रकाश भारती एवं सौरभ पाठक की सेट सज्जा, किशन कुमार एवं सौरभ कुमार के ध्वनि संचालन, शिवम् कुमार एवं अनुज की वेशभूषा, रूपेश सुमित के प्रोडक्शन कंट्रोल तथा कुमार आशय, समर प्रताप एवं ऐश्वर्या सोनी के पूर्वाभ्यास एवं मंच संचालन ने प्रस्तुति को उत्कृष्ट रूप प्रदान किया।
तीन दिनों तक चले “पटरंगम 2026” में बिहार के विभिन्न रंग समूहों ने नुक्कड़ नाटक एवं रंगमंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, न्याय व्यवस्था, सामाजिक कुरीतियों, प्रशासनिक विसंगतियों और मानवीय मूल्यों जैसे विविध विषयों को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया। महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में रंगकर्मियों, कलाकारों, साहित्यकारों एवं कला-प्रेमियों की सक्रिय सहभागिता रही।
समापन अवसर पर आयोजकों ने कहा कि पटरंगम 2026 का उद्देश्य केवल नाट्य प्रस्तुतियाँ करना नहीं, बल्कि रंगमंच के माध्यम से समाज में संवाद, संवेदना और सकारात्मक परिवर्तन की चेतना को मजबूत करना है। सफल आयोजन के लिए सभी कलाकारों, तकनीकी सहयोगियों, अतिथियों, दर्शकों तथा कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
