विश्वभर से आए विद्यार्थियों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ..

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#ख़बरें Tv: नालंदा विश्वविद्यालय ने आज शैक्षणिक सत्र 2026–28 के लिए नवप्रवेशी विद्यार्थियों का औपचारिक स्वागत किया। देश-विदेश से आए विद्यार्थियों ने ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन कार्यक्रम के साथ अपने नए शैक्षणिक सफर की शुरुआत की। यह अवसर विश्वविद्यालय के निरंतर बढ़ते वैश्विक स्वरूप और ज्ञान की साझा परंपरा का जीवंत परिचायक बना।
इंडक्शन कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संस्कृति, परिसर जीवन तथा स्नातकोत्तर शिक्षा की विशिष्ट पद्धति से परिचित कराया गया। इस वर्ष विश्वविद्यालय ने 1,000 से अधिक विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। साथ ही, विभिन्न देशों से प्राप्त आवेदनों और नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि ने नालंदा विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ किया है। विविध राष्ट्रीयताओं और शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आए विद्यार्थी अब राजगीर स्थित परिसर में एक बहुसांस्कृतिक एवं जीवंत अकादमिक समुदाय का हिस्सा बनेंगे।
नवप्रवेशी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने उन्हें जिज्ञासु बने रहने, स्थापित धारणाओं पर प्रश्न उठाने और अपनी विषय-सीमा से आगे बढ़कर नए विचारों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नालंदा में शिक्षा का उद्देश्य केवल उत्तर उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे प्रश्नों को जन्म देना है जो ज्ञान के नए आयाम खोल सकें।
उन्होंने कहा, “नालंदा में सीखने की शुरुआत प्रश्न पूछने के साहस और नए दृष्टिकोणों को स्वीकार करने की उदारता से होती है। हमारी सबसे बड़ी शक्ति विविध विषयों, संस्कृतियों और बौद्धिक परंपराओं को एक मंच पर लाकर ज्ञान का सामूहिक विस्तार करना है।”
प्रो. चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की शोध-केंद्रित शैक्षणिक व्यवस्था पर बल देते हुए कहा कि नालंदा का उद्देश्य ऐसे शोधार्थियों और विद्वानों का निर्माण करना है जो आलोचनात्मक चिंतन, सहयोगात्मक दृष्टिकोण और मौलिक अनुसंधान के माध्यम से समकालीन वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोज सकें। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक विमर्श के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।
उन्होंने नए सत्र में शुरू की जा रही कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहलों की जानकारी दी। इनमें “नालंदा” नामक साझा अंतर्विषयी फाउंडेशन कोर्स, रिसर्च मेथडोलॉजी का अनिवार्य पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित करने वाला संशोधित क्रेडिट ढांचा तथा ‘शास्त्रार्थ’ को अकादमिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना शामिल है। उन्होंने विश्वविद्यालय की ‘सहभागिता’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से विद्यार्थी आसपास के गांवों के साथ अनुसंधान आधारित साझेदारी और अनुभवात्मक शिक्षण से जुड़ेंगे।
कुलपति ने विश्वविद्यालय की नेट ज़ीरो प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी जीवनशैली अपनाने और परिसर की सतत विकास संबंधी पहलों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, छात्र एवं संकाय विनिमय, अनुसंधान साझेदारियों तथा अकादमिक, सांस्कृतिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए उपलब्ध हो रहे नए अवसरों की भी चर्चा की।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री स्वधा रिज़वी (आईएफ़एस) ने छात्र अभिमुखीकरण व्याख्यान दिया। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की बहुराष्ट्रीय एवं बहुसांस्कृतिक छात्र समुदाय की विशेषता का उल्लेख करते हुए कहा कि यही विविधता विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सम्मान करने, अपने शैक्षणिक दायित्वों के प्रति प्रतिबद्ध रहने तथा विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी व्यवहार अपनाने का आग्रह किया। उद्घाटन सत्र में रजिस्ट्रार डा. रमेश प्रताप सिंह परिहार सहित सहित सभी स्कूलों के डीन, विश्विद्यालय के कमिटियों के प्रमुखों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. किशोर धावला ने किया, जबकि डॉ. इंद्राणी बरपुजारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इंडक्शन कार्यक्रम के समापन सत्र के अंतर्गत 4 अगस्त 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय, स्पिक मैके चैप्टर के सहयोग से विश्वामित्रालय सभागार में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए एक विशेष कर्नाटक वायलिन युगल संगीत संध्या का आयोजन करेगा। इस अवसर पर विख्यात वायलिन वादक विद्वान डॉ. मैसूर मंजूनाथ एवं श्री सुमंत मंजूनाथ अपनी प्रस्तुति देंगे।
