• Sat. Apr 18th, 2026

#bihar: समाज और घरों से विलुप्ति की कगार पर जांता व सिलवट-लोढा….

Bykhabretv-raj

Apr 18, 2026

 

 

 

 

 

 

समाज और घरों से विलुप्ति की कगार पर जांता व सिलवट-लोढा….

 

 

 

 

 

 

ख़बरें टी वी : पिछले 16 वर्षो से ख़बर में सर्वश्रेष्ठ.. ख़बरें टी वी ” आप सब की आवाज ” …आप या आपके आसपास की खबरों के लिए हमारे इस नंबर पर खबर को व्हाट्सएप पर शेयर करें… ई. शिव कुमार, “ई. राज” -9334598481.

.. हमारी मुहिम .. नशा मुक्त हर घर .. बच्चे और नवयुवक ड्रग्स छोड़ें .. जीवन बचाएं, जीवन अनमोल है .. नशा करने वाले संगति से बचे ..

… हमारे प्लेटफार्म पर गूगल द्वारा प्रसारित विज्ञापन का हमारे चैनल के द्वारा कोई निजी परामर्श नहीं है, वह स्वतः प्रसारित होता है …

 

 

 

 

 

 

#ख़बरें Tv: हरनौत, तेजी से बढ़ते आधुनिकता व विलासिता के इस दौर में परंपरागत घरेलू यंत्र विलुप्ति के कगार पर हैं। दैनिक उपयोग में आने वाले घरेलू परंपरागत यंत्रों में शुमार ढेंकी, सिलवट, जांता की आवाज अब घरों में सुनाई नहीं पड़ती है।भले ही शादी विवाह में लड़की के ओखली-समाट गांव-,जवार में दिखते होंगे। लेकिन ये भी विलुप्त होते जा रहा है। एक समय यह घर-घर में उपलब्ध होता था एवं लोग धान कूटने, आटा व मसाला पीसने के लिए जहां ढेंकी, सिलवट व जांता का उपयोग करते थे वहीं आज इनकी जगह राइस मिल, मिक्सर मशीन, पोर्टेबल
मील व आटा चक्की ने ले ली है। आराम व कम लगात की जद्दोजहद में परंपरागत यंत्र लोगों से दूर होते चले गए। एक समय ऐसा भी था जब गांव के किसी घर में महिलाएं गाना गाते हुए ढेंकी से धान कूटती थी एवं विभिन्न पर्व त्योहार के अवसर पर दो-तीन महिलाएं एक साथ जांता से आटा पीसने का काम करती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

बेरोजगार हुए कारीगर

वहीं स्थानीय बाजार के आरपीएस कॉलेज के पास स्थित एक मकान में तकरीबन 20 कारीगर बक्सर जिले के डुमरांव से आकर करिब दो सप्ताह से रह रहे हैं।
यह कारिगर सिलवट ,जांता आदि घरेलू यंत्र बनाकर विभिन्न गांवों में घुम-घुम कर बेचते है। कारीगर में शामिल
मुरारी राम, रोहित कंजर, श्याम बिहारी राम,दुर्गेश राम, राधिका देवी, पुष्पा देवी ,अजय, सत्येंद्र, विश्वकर्मा, करण ,अर्जुन, आदि बताते हैं कि हम लोग बचपन से ही इस व्यवसाय में जुड़े है और हमारी जीविका चलती है। लेकिन अब हमलोग अधिकांश कारीगर बेरोजगार होते जा हैं। उनके द्वारा निर्मित जांता, सिलवट व लोढ़ा के निर्माण में जिनता मेहनत लगता है उतना उन्हें मुनाफा नहीं मिलता है। कारण यह कि बाजारों में कम दाम में उसके वैकल्पिक सामान उपलब्ध हो चुके हैं। इसका सीधा असर इनके व्यवसाय पर पड़ा है एवं रोजी-रोजी प्रभावित हो रही है। वे बताते हैं कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर ,बनारस, विंध्याचल से आदि जगहों से यह गुहुवन पत्थर ट्रक से लाते हैं और हाथ से उनका आकार देते हैं। उन्होंने कहा कि यहां 400-500 रूपये में जांता जबकि 250-300 रुपए में सिलवट व लोढ़ा बेच रहे हैं।

बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं लोग :

वहीं मौके पर मौजूद शिवाजी नगर के महिला रंजू देवी एवं शांति देवी ने बताया कि
सिलवट पर लोढ़ा से चटनी,मसाले,जड़ी-बूटियाँ और मसालों को हाथ से पीसने के लिए जबकि जांता से दाल , संतू आदि पीसने काम हमलोग अभि भी कर रहे हैं।वे बताते हैं कि घरों में दैनिक उपयोग में आने वाले परंपरागत घरेलू यंत्र (सिलवट , जांता आदि)
का उपयोग बंद होने से लोगों को सुविधा तो जरूर मिल रही है। परंतु उससे लोग कई तरह की बीमारियों से भी ग्रसित होने लगे हैं। पहले लोग अपने घरों में ढेंकी से धान कूट कर चावल बनाते थे और खाते थे परंतु अब राइस मील के चावल पर निर्भर हो गए हैं। इन मीलों से तैयार चावल को केमिकल का उपयोग कर पालिश कर चमकदार बनाया जाता है। जिसका सेवन कर लोग बीमार पड़ रहे हैं। वहीं इसी प्रकार तेल मसाला आदि चीज जो घरों में पीस कर खाते थे, वह अब विभिन्न कंपनी द्वारा तैयार रेडीमेड तेल मसाला का उपयोग होता है। इसमें मिलावट के कारण कई तरह की बीमारियां होने की संभावना रहती है।

हरिओम की रिपोर्ट….