नालंदा में वर्तमान MLC के खिलाफ शिक्षकों में उबाल, डॉ. दिव्या ज्योति के समर्थन में बदलाव का संकल्प..
शिक्षकों ने कहा—अब चाहिए जवाबदेह प्रतिनिधित्व, सिर्फ आश्वासन नहीं…

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@ख़बरें Tv: बिहारशरीफ, नालंदा : पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक बदलाव की आहट अब नालंदा की धरती पर भी साफ दिखाई देने लगी है। जन सुराज नेत्री एवं एमएलसी प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति ने आज बिहारशरीफ और सोहसराय क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों का दौरा कर शिक्षक साथियों से सीधा संवाद किया। इस दौरान शिक्षकों के बीच वर्तमान MLC के प्रति नाराजगी और असंतोष खुलकर सामने आया।
डॉ. दिव्या ज्योति ने बड़ीपहाड़ी राष्ट्रीय +2 उच्च विद्यालय, बिहारशरीफ; K.S.T. College, सलेमपुर, सोहसराय; देवशरण वीमेंस इवनिंग कॉलेज, सोहसराय; संकुल संसाधन केंद्र, कन्या मध्य विद्यालय, सोहसराय तथा नालंदा कॉलेजिएट +2 स्कूल, बिहारशरीफ में शिक्षक साथियों से मुलाकात की।
शिक्षकों ने संवाद के दौरान अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं, अधिकारों और अपेक्षाओं को सामने रखते हुए वर्तमान शिक्षक प्रतिनिधित्व पर सवाल खड़े किए। कई शिक्षकों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अब ऐसा प्रतिनिधित्व चाहिए जो चुनाव के बाद भी शिक्षकों के बीच मौजूद रहे, उनकी समस्याओं को सुने और समाधान के लिए लगातार संघर्ष करे।
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा—
“शिक्षक समाज ने बहुत इंतजार कर लिया। अब केवल वादों और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। शिक्षक को ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो सदन में उसकी आवाज बने और सड़क से सदन तक उसके अधिकारों की लड़ाई लड़े।”
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नाराजगी को केवल चुनावी माहौल समझना बड़ी भूल होगी। यह वर्षों से जमा असंतोष और प्रभावी प्रतिनिधित्व की मांग है।
उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा—
“जब शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा हो, तब शिक्षक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देना नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में शिक्षकों के बीच खड़ा रहना है।”
डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि अब शिक्षक समाज पुरानी राजनीतिक कार्यशैली और निष्क्रिय प्रतिनिधित्व से आगे बढ़कर नई सोच, नई ऊर्जा और जवाबदेह नेतृत्व चाहता है।
उन्होंने स्पष्ट किया—
🔥 अब सिर्फ चेहरा नहीं, काम का हिसाब चाहिए।
🔥 अब सिर्फ आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए।
🔥 अब सिर्फ प्रतिनिधि नहीं, संघर्ष करने वाला नेतृत्व चाहिए।
🔥 अब शिक्षक की आवाज़ को सदन में मजबूती से उठाने वाला नेतृत्व चाहिए।
नालंदा के शिक्षक साथियों द्वारा व्यक्त समर्थन को लेकर डॉ. दिव्या ज्योति ने कहा कि यह समर्थन किसी व्यक्ति के पक्ष में मात्र समर्थन नहीं, बल्कि शिक्षक हित में बदलाव की इच्छा का संकेत है।
उन्होंने कहा—
“मैं शिक्षकों से वोट मांगने नहीं, उनका विश्वास और जिम्मेदारी लेने आई हूं। अगर शिक्षक समाज मुझे अपना प्रतिनिधित्व देता है, तो उनकी आवाज़ मेरी आवाज़ होगी और उनका संघर्ष मेरा संघर्ष होगा।”
उन्होंने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों का वेतन, संबद्ध एवं अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों के अधिकार, पुरानी पेंशन, समयबद्ध पदोन्नति, वेतन विसंगति, पारदर्शी स्थानांतरण नीति और शिक्षक सम्मान जैसे मुद्दों पर निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
नालंदा से उठी आवाज़ अब पूरे पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में गूंजेगी!
“बहुत हुआ इंतजार—अब चाहिए बदलाव!”
“शिक्षक की आवाज़—अब होगी निर्णायक आवाज़!”
“निष्क्रिय प्रतिनिधित्व नहीं—जवाबदेह नेतृत्व चाहिए!”
