नालंदा विश्वविद्यालय में हिन्दी के संवर्धन और वैश्विक संवाद पर राष्ट्रीय संगोष्ठी…

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार; जनवरी 08, 2026; नालंदा विश्वविद्यालय में 9–10 जनवरी 2026 को “हिन्दी के संवर्धन और वैश्विक संवाद में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका” विषय पर एक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में देश-विदेश से 100 से अधिक विद्वान सहभागिता कर रहे हैं, जिनमें वरिष्ठ अध्येता, उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपति एवं प्राध्यापक, हिन्दी सेवी संस्थाओं के पदाधिकारी, पत्र-पत्रिकाओं एवं मीडिया जगत के संपादक, लेखक, प्रशासक तथा शोधार्थी सम्मिलित हैं। यह आयोजन हिन्दी भाषा की समकालीन भूमिका, उसकी वैश्विक स्वीकार्यता तथा भारतीय ज्ञान परम्परा में उसकी केन्द्रीय स्थिति पर बहुआयामी विमर्श को आगे बढ़ाएगा।
संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र 9 जनवरी को प्रातः 11 बजे सुषमा स्वराज सभागृह में आयोजित होगा। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी द्वारा विषय प्रवर्तन किया जाएगा। इस अवसर पर बिहार संग्रहालय के महानिदेशक एवं बिहार सरकार के पूर्व मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह, अज़रबैजान में भारत के राजदूत श्री अभय कुमार, तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक एवं पूर्व राज्यसभा सांसद श्री तरुण विजय जी जैसे विशिष्ट अतिथि अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएँगे। दो दिनों में आयोजित इस संगोष्ठी में कुल सात अकादमिक सत्र तथा एक समापन सत्र प्रस्तावित हैं।
संगोष्ठी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर, केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान (CIHTS), दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, हिन्दी साहित्य सम्मेलन सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े विद्वान वक्ता अपने शोधपरक विचार प्रस्तुत करेंगे। कुछ सत्रों में ऑनलाइन सहभागिता भी होगी, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण करेगा।
संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित प्रथम सत्र “भाषायी नवाचार और सम्पादकीय दृष्टि” में हिन्दी पत्रकारिता, सम्पादन और भाषा के समकालीन स्वरूप पर विमर्श किया जाएगा। इस सत्र की अध्यक्षता श्री तरुण विजय जी (पूर्व राज्यसभा सांसद एवं संपादक पाञ्चजन्य) करेंगे। प्रमुख वक्ताओं में श्री जयदीप कर्णिक जी (डिजिटल संपादक, अमर उजाला), प्रो. अरुण कुमार भगत जी (सदस्य, बिहार लोक सेवा आयोग), प्रो. हेमन्त कुकरेती जी (संयुक्त संपादक, अमृत मंथन) तथा श्री सचिन जोशी जी (लेखक एवं पत्रकार) सम्मिलित हैं।
द्वितीय सत्र “नालंदा और साहित्यिक संस्कृति” में नालंदा की ऐतिहासिक, बौद्धिक एवं साहित्यिक परम्परा पर केन्द्रित विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। इस सत्र की अध्यक्षता श्री अंजनी कुमार सिंह जी (महानिदेशक, नालंदा संग्रहालय) करेंगे। वक्ताओं में प्रो. शिव कुमार सिंह जी (लिस्बन विश्वविद्यालय, पुर्तगाल), प्रो. हीरा पॉल गांगनेगी जी (पूर्व विभागाध्यक्ष, दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ. विनायक पाण्डेय जी (महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि, उज्जैन) तथा प्रो. शिवपाल शर्मा जी (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) प्रमुख हैं।
तृतीय सत्र “भाषायी नवाचार: कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं तकनीकी अनुप्रयोग” हिन्दी भाषा के डिजिटल भविष्य पर केन्द्रित है। इस सत्र की अध्यक्षता श्री अमिताभ नाग जी (CEO, भाषिणी—डिजिटल इंडिया परियोजना) करेंगे। इसमें प्रो. अम्बा कुलकर्णी (हैदराबाद विश्वविद्यालय), प्रो. (डॉ.) साई रामकृष्ण सुसरला (MIT–IIKS) तथा प्रो. अनंत भट्टाचार्य जी (IIT कानपुर) जैसे विशेषज्ञ ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता करेंगे।
चतुर्थ सत्र “हिन्दी की सांस्कृतिक और दार्शनिक भूमिका” में हिन्दी के बौद्धिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक आयामों पर विचार होगा। सत्र की अध्यक्षता प्रो. हरिकेश सिंह जी (पूर्व कुलपति, जयप्रकाश विश्वविद्यालय) करेंगे। वक्ताओं में प्रो. एच.पी. शुक्ला जी, प्रो. हुलनाथ पाण्डेय जी (मुंबई विश्वविद्यालय), प्रो. प्रमोद कुमार जी (बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर), प्रो. जैनेन्द्र कुमार पाण्डेय जी तथा डॉ. शशिप्रभा अत्री जी सम्मिलित हैं।
द्वितीय दिवस पर आयोजित पंचम सत्र “उच्च शिक्षण संस्थानों का योगदान” तथा षष्ठ सत्र “हिन्दी सेवी संस्थाओं का योगदान” में देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों और हिन्दी प्रचार संस्थाओं की भूमिका पर विचार किया जाएगा। इन सत्रों में प्रो. कृष्ण कुमार सिंह, प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी, प्रो. राजकुमार जी, प्रो. आर. एस. सराजू, प्रो. संकेतु सांकृत्य, श्री हेमचन्द्र वैद्य जी, श्री कुन्तक मिश्र जी, प्रो. अन्नपूर्णा सी. जी सहित अनेक प्रतिष्ठित विद्वान अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
अंतिम अकादमिक सत्र “संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में हिन्दी” विषय पर केन्द्रित होगा, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती अंजू रंजन जी (संयुक्त सचिव, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार) करेंगी। इस सत्र में राजदूत अभय कुमार जी, प्रो. विनोद कुमार मिश्र जी (पूर्व महासचिव, विश्व हिन्दी सचिवालय, मॉरीशस), प्रो. दिलीप सिंह जी तथा डॉ. राजेश्वर कुमार जी जैसे वरिष्ठ वक्ता हिन्दी की वैश्विक भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे।
10 जनवरी 2026 को आयोजित समापन सत्र में संगोष्ठी के समस्त विमर्श का सार प्रस्तुत किया जाएगा तथा हिन्दी भाषा के भविष्य, वैश्विक संवाद में उसकी भूमिका और नालंदा परम्परा की प्रासंगिकता पर समेकित दृष्टि विकसित की जाएगी।
