नन्हे कदमों का हुआ भव्य स्वागत हुआ पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड में बाल वाटिका-3 के नव-प्रवेशी बच्चों का पहला दिन…

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#ख़बरें Tv: पटना। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड, पटना के परिसर में आज एक अलग ही रौनक देखने को मिली। अवसर था शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में ‘बाल वाटिका-3’ (किंडरगार्टन-3) के नन्हे-मुन्ने बच्चों के पहले दिन का। विद्यालय के लिए यह दिन केवल एक शुरुआत नहीं, बल्कि उन नन्हे सपनों को पंख देने की दिशा में पहला कदम था, जो आज पहली बार औपचारिक शिक्षा की दहलीज पर पहुंचे थे।
**प्राचार्य की अनूठी पहल: आत्मीय संवाद से जीती बच्चों की मुस्कान**
नन्हे बच्चों के मन में स्कूल के पहले दिन को लेकर अक्सर थोड़ी घबराहट और उत्सुकता होती है। बच्चों के इसी डर को दूर करने और उन्हें घर जैसा माहौल प्रदान करने के लिए **प्राचार्य श्री मिथिलेश कुमार सिंह** ने एक सराहनीय और आत्मीय पहल की। अमूमन प्रधानाचार्य कार्यालय की छवि बच्चों के लिए गंभीर होती है, लेकिन श्री सिंह ने इस धारणा को बदलते हुए बाल वाटिका-3 के बच्चों को अपने कक्ष में आमंत्रित किया।
प्राचार्य महोदय ने बाल वाटिका-3 की शिक्षिकाओं के साथ मिलकर बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से बड़े ही सरल और सहज अंदाज में बात की, उनके नाम पूछे और उनके छोटे-छोटे जवाबों पर उनका उत्साहवर्धन किया। प्राचार्य के इस व्यवहार ने बच्चों के मन से अनजान जगह का डर पूरी तरह निकाल दिया।
**खुशनुमा माहौल और विद्यालयी परिवेश से परिचय**
इस मुलाकात के दौरान बच्चों को विद्यालय की कार्यप्रणाली और वहां के वातावरण से बहुत ही रोचक तरीके से परिचित कराया गया। प्राचार्य श्री मिथिलेश कुमार सिंह ने बच्चों को नए सत्र के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा— *”ये नन्हे बच्चे हमारे विद्यालय की सबसे अनमोल पूंजी हैं। हमारा उद्देश्य केवल इन्हें पढ़ाना नहीं, बल्कि इनके भीतर छिपी रचनात्मकता और मासूमियत को सहेजते हुए इनका सर्वांगीण विकास करना है।”*
बच्चों के स्वागत के लिए विद्यालय की शिक्षिकाओं ने भी विशेष तैयारी की थी। रंग-बिरंगे खिलौनों, चित्रों और आकर्षक शिक्षण सामग्रियों के बीच बच्चों ने अपने पहले दिन को भरपूर एंजॉय किया।
**शिक्षिकाओं का समर्पण और बच्चों की प्रसन्नता**
संवाद के दौरान बाल वाटिका की शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहीं, जिन्होंने बच्चों को अपनी ममतामयी देखरेख का आश्वासन दिया। प्राचार्य के साथ हुए इस सीधे संवाद से बच्चे काफी प्रसन्न और उत्साहित दिखे। उनके चेहरों की खिलखिलाहट गवाह थी कि उनके जीवन का यह नया अध्याय बहुत ही सुखद रहने वाला है।
