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#bihar: डॉ दिलीप कुमार ने मघड़ा जाकर 2 दिन पहले हुई हृदय विदारक घटना का अवलोकन किया….

Bykhabretv-raj

Apr 2, 2026

 

 

 

 

डॉ दिलीप कुमार ने मघड़ा जाकर 2 दिन पहले हुई हृदय विदारक घटना का अवलोकन किया….

 

 

 

 

 

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आज दिनांक 2 अप्रैल 2026 दिन गुरुवार को विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य व स्नातक अधिकार मंच के संयोजक डॉ दिलीप कुमार ने मघड़ा जाकर 2 दिन पहले हुई हृदय विदारक घटना का अवलोकन किया विगत 31 मार्च को मघड़ा के शीतला माता मंदिर प्रांगण में दम घुटने से आठ श्रद्धालु महिलाओं की मौत हो गई थी वहां पर उपस्थित प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह मंदिर बहुत ही पौराणिक है और यहां बरसों से प्रत्येक मंगलवार को जल चढ़ाने एवं पूजा अर्चना के लिए काफी भीड़ होते आई है खास करके सीतलाष्टमी में एवं चैत महीना के अंतिम मंगलवार को यहां पर सिर्फ जिले के ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश और देश से श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए आते रहे हैं यहां के जो पुजारी लोग हैं उनके द्वारा ही इस मंदिर में पूजा अर्चना करवाया जाता है यह घटना एक संयोग मात्र है अधिक भीड़ होने के कारण और थोड़ी गर्मी रहने के कारण श्रद्धालु आपस में आपाधापी करने के चक्कर में मंदिर में अधिक संख्या में लोग प्रवेश कर गए जिसे यहां के पुजारी कंट्रोल नहीं कर पाए इसी कारण यह हादसा हुआ है डॉक्टर दिलीप कुमार ने वहां उपस्थित लोगों से यह भी जानकारी प्राप्त की की समय-समय पर यहां जिला प्रशासन के द्वारा मेले में प्रशासनिक व्यवस्था रहती थी इस घटना पर दुख एवं शोक व्यक्त करते हुए डॉ दिलीप कुमार ने कहा कि यह दुखद घटना एक संयोग है इसमें किसी पर दोषारोपण नहीं किया जा सकता है कुछ गलतियां यहां के पूजा समिति के लोगों से भी हुई जिन्होंने जिला प्रशासन को यह सूचना नहीं दिया कि यहां पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण प्रशासनिक सुरक्षा की आवश्यकता है
दूसरी तरफ उसी दिन भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का कार्यक्रम था जिला प्रशासन एवं जिले का पूरा पुलिस महकमा प्रशासनिक पदाधिकारी एवं थाने के सभी स्टाफ यहां तक की थाना प्रभारी से लेकर जिले के सभी वरीय पुलिस पदाधिकारी एवं आरक्षिगण उनके ही प्रोटोकॉल के तहत इन लोगों की ड्यूटी लगा दी गई थी यह घटना काफी हृदयविदारक है जिला प्रशासन को इस पर अवश्य संज्ञान लेना चाहिए ऐसा नहीं कि यह घटना हुई और सिर्फ रिपोर्ट बनाकर इसे लीपा पोती कर दिया जाए नालंदा जिले में और भी कई महत्वपूर्ण मंदिर हैं जहां पर समय-समय पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है इसका ध्यान जिला प्रशासन को रखना चाहिए जिस तरह से बिहार शरीफ में रामनवमी महोत्सव को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखा जाता है इसी तरह से इन मंदिरों की भी प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त दुरुस्त होनी चाहिए जिला प्रशासन को चाहिए की बड़गांव सूर्य मंदिर औंगारी सूर्य मंदिर माँ आशापुरी मंदिर घोसरामा मां मनसा माता मंदिर पिलिच्छ मां शीतला माता मंदिर मघड़ा महतो बाबा का मंदिर परनामा जैसे जगहों पर जाकर वहाँ के मंदिर के पुजारियों और ग्रामवासियों से मिलकर इन जगहों पर ट्रस्ट बनवाकर इन मंदिरों को राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड से जुड़वा देना चाहिए
चूँकी ये मंदिर हमारी धार्मिक आस्था से जुड़े हैं तो यहाँ तो समय समय पर और ख़ासकर त्योहारों के समय भीड़ भाड़ तो होगी ही जिसे लगाम नहीं लगाया जा सकता है लेकिन इन जगहों पर प्रशासनिक व्यवस्था करके सुचारू रूप से पूजा पाठ करवाई जा सकती है साथ ही दिलीप कुमार ने कहा कि इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए सिर्फ खाना पूर्ति करने के लिए थाना प्रभारी को सस्पेंड करना और पुजारी को जेल भेजना यह उचित कदम नहीं है थाना प्रभारी अपनी मर्जी से राष्ट्रपति महोदय का ड्यूटी में नहीं लगे हुए थे कहीं न कहीं प्रशासनिक आलाअधिकारियों के आदेश से ही महामहिम राष्ट्रपति महोदय के सुरक्षा में यह लोग लगे हुए थे लेकिन सिर्फ खाना पूर्ति करने के लिए थाना प्रभारी को सस्पेंड करना यह उचित कदम नहीं है इसे देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि यह घटना भी सिर्फ खाना पूर्ति होकर रह जाएगी दिलीप कुमार ने कहा कि विश्व मानवाधिकार सुरक्षा आयोग के अध्यक्ष डॉ तपन कुमार को भी इस घटना की जानकारी दूरभाष के माध्यम से दे दी गई है डॉक्टर तपन कुमार ने भी इस घटना पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी तरफ से भी जल्द ही दिल्ली से एक टीम गठित कर जांच करवाई जाएगी दिलीप कुमार ने जिला प्रशासन से इस घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की साथ ही जल्द से जल्द नालंदा के सभी पौराणिक मंदिर स्थलों का ट्रस्टीकरण एवं उसे धार्मिक न्यास परिषद से जुड़वाने की अपील करते हुए कहा कि निर्दोष ब्राह्मण पुजारी एवं निर्दोष पुलिस विभाग के छोटे पदाधिकारी पर इस तरह की कार्रवाई को अविलंब वापस ले लेना चाहिए और इसमें जो भी दोषी लोग हैं उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें साथ ही मृतकों के आश्रितों को कम से कम दस दस लाख रुपये मुआवजा राज्य सरकार की ओर से मिलनी चाहिए ।