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#bihar: सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों के पर्दे, टेबल क्लॉथ, बिहार में हस्तकरघे पर बुने कपड़े के इस्तेमाल किये जाएं…

Bykhabretv-raj

Aug 9, 2026

 

 

 

 

 सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों के पर्दे, टेबल क्लॉथ, बिहार में हस्तकरघे पर बुने कपड़े के इस्तेमाल किये जाएं…

 7 जुलाई को ” हथकरघा दिवस ” के मौक़ा पर राष्ट्रपति द्वारा बुनकरों को पुरस्कार दिया जाता है.

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: ये तस्वीरें बिहार शरीफ़ ( नालंदा ज़िला मुख्यालय ) के करघोँ की बदहाल स्थिती की गवाही है.
एक ज़माना था, जब भारत के राष्ट्रपति भवन में बिहार शरीफ़ ( ख़ास गंज ) के करघोँ पर महिलाओं के हाथों का बुना ” पैटर्न डिज़ाईन ” का पर्दा टंगा होता था….!
ये कमाल का हुनर ” अंसारी और तांती ” जातियों से आनेवाले महिला… पुरुष की उंगलियों में थी.
हस्तकरघा को ” पॉवर लूम ” ने तो नुक़सान पहुँचाया ही, उससे ज़्यादह ” सब्सिडी ” ने नुक़सान पहुँचाया है.
इसी सब्सिडी ने खादी को भी बर्बाद किया है.
वैसे तो, सरकार की औद्योगिक नीति को भी ज़िम्मेदार ठहरा ही सकते हैँ.
मेरी नज़रों ने देखा है, कि सब्सिडी के चलते ” फ़र्ज़ी… काग़ज़ी ” उत्पादन और बिक्री के खेल ने करघोँ को बन्द करा दिया.
बिहार शरीफ़ शहर में ही जीवित हस्त करघोँ की संख्या तीन अंकों को नहीं छुएगी, लेकिन ” प्राथमिक हस्तकरघा बुनकर सहयोग समितियाँ ” काग़ज़ पर तीन अंकों को लाँघ जाएगी…?
सरकार का सहकारिता विभाग भी इन मृत कॉपरेटिव्स को काग़ज़ पर ज़िंदह रखने में ख़ूब रुपये कमाती है.
इन्हीं काग़ज़ी कॉप्रेटिवों के फ़र्ज़ी अध्यक्ष ही शीर्ष सहकारी समितियों पर येन केन प्रकारेन… क़ाबिज़ हो जाते हैँ.
सरकार अनुदानों… और योजनाओं की बंदरबाँट के अलावाह कुछ नहीं होता है.
इसी बंदर बांट को नापसंद करने के चलते ” बिहार राज्य हस्तकरघा बुनकर सहयोग समितियाँ संघ ” के निदेशक मंडल की बैठकों में ख़ालिद रशीद सबा ( पूर्व मंत्री ) तथा अन्य निदेशकों से मेरी नहीं पटती थी.
उनका दबाव रहता था कि ” लूट में चर्खा ” मैं भी ले लूँ…!
विगत सप्ताह मुकक़ात के दौरान नालंदा की ज़िला अधिकारी महोदया ने इक्षा ज़ाहिर की, कि वो हस्तकरघा विकास केलिये बहूत कुछ करना चाहती हैँ..!
जिसपर, मेरा सुझाव था कि सबसे पहले इन ” काग़ज़ी सहयोग समितियों ” को दुरुस्त किये बगैर सारी योजनाएं फ़ेल कर जाएंगी, जैसे चिल्लर जिस्म के ख़ून को पी जाता है…?
नीतीश कुमार जी ने हस्पतालों में बेडों पर सात दिनों में सात रंग की चादर बिछाने का निर्णय लिया था.
लेकिन इन्हीं फ़र्ज़ीवाड़ों ने सब ध्वस्त करा दिया.
तमाम सरकारी कार्यालयों… विद्यालयों के खिड़की… किवाड़ के पर्दे… टेबल क्लॉथ, बिहार में हस्तकरघे पर बुने कपड़े के इस्तेमाल किये जाएं.
सभी पार्टियां अपने अपने झंडे केलिये इसी तरह कपड़े के इस्तेमाल करें.