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#bihar: बिहार बालगीत-संग्रह लोकार्पण डॉ किशोर सिन्हा के बालगीत-संग्रह ‘मोही और दद्दू’ का लोकार्पण…

Bykhabretv-raj

Aug 3, 2026

 

 

 

 

 

 

 

बिहार बालगीत-संग्रह लोकार्पण
डॉ किशोर सिन्हा के बालगीत-संग्रह ‘मोही और दद्दू’ का लोकार्पण…

 

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: पटना, 02 अगस्त ‘‘साहित्यकार और नाटककार डॉ किशोर सिन्हा के बालगीत-संग्रह ‘दद्दू और पोती’ का लोकार्पण स्थानीय जगजीवन राम शोध संस्थान में रविवार को सम्पन्न हुआ।
लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता जाने-माने कवि/कथाकार और बाल-साहित्य के रचनाकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ नाटककार प्रो. नरेन्द्रनाथ पांडेय, सुपरिचित कथाकार श्रीमती भावना शेखर, कवि और चिंतक शिवदयाल, प्रख्यात कवि और शिक्षाविद डॉ शिवनारायण और बेतिया से आये वरिष्ठ गीतकार डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना सहित अनेक गणमान्य साहित्यकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी और नृत्यांगना श्वेता सुरभि ने किया। इस अवसर पर पुस्तक के गीतों पर डॉ किशोर सिन्हा द्वारा बनाये हुए संगीत-वीडियो-अलबम का प्रदर्शन भी किया गया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री द्विवेदी ने कहा कि यह संग्रहालय दद्दू और पोती के बीच जीवंत संवादों से ओतप्रोत है, जिसमें बच्चों की बड़ी प्यारी कवितायें संकलित हैं
कवि और चिंतक शिवदयाल ने कहा कि ‘मोही और दद्दू’ केवल बाल गीतों का संग्रह नहीं, इसमें दादा और पोती के बीच के अनमोल रिश्ते को शब्दों में बाँधने की कोशिश की गई है। इसमें बाल मन को समझने और बाल सुलभ चेष्टाओं का भी नजदीकी अनवीक्षण है, जो बहुत रोचक और मज़ेदार भी है।
कथाकार भावना शेखर ने बताया कि पुस्तक वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित है। आज अधिकांश बुज़ुर्ग नई पीढ़ी से दूर हैं। नई पीढ़ी भी उनके प्रति उदासीन हैं। ऐसे में रिश्ते वरिष्ठ नागरिकों का साथ छोड़ देते हैं। यह पुस्तक बिछोह के घाव पर मरहम का काम करेगी।
लेखकीय वक्तव्य के रूप में डॉ किशोर सिन्हा ने उपस्थित विद्वानों का स्वागत् और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बालगीत-संग्रह ‘मोही और दद्दू’ बच्चों के लिए मेरी पहली और कुल मिलाकर 33वीं पुस्तक है, जिसमें दादा और पोती की कोमल भावनाओं की अभिव्यक्ति मिलेगी।
सुप्रसिद्ध गीतकार और गायक मधुरेश नारायण ने स्वागत-सम्बोधन दिया। समारोह के विशिष्ट अतिथि, वरिष्ठ नाटककार प्रो. नरेन्द्रनाथ पांडेय थे। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ आराधना प्रसाद की सरस्वती-वंदना से हुआ।