नालंदा विश्वविद्यालय में “सांस्कृतिक सम्बन्ध” पर आईसीसीआर महानिदेशक ने साझा किए विचार…

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राजगीर, नालन्दा, बिहार (20 अप्रैल 2026): नालन्दा विश्वविद्यालय में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की महानिदेशक श्रीमती के. नंदिनी सिंगला ने “सांस्कृतिक सम्बन्ध” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। इस अवसर पर परिषद के उप-महानिदेशक श्री आशीष रंजन और आईसीसीआर पटना क्षेत्रीय कार्यालय की प्रमुख सुश्री स्वधा रिज़वी की भी विशिष्ट उपस्थिति रही। अपने संबोधन में, उन्होंने भारत की विस्तार लेती वैश्विक भूमिका और राष्ट्र की ‘सॉफ्ट पावर’ के आधार स्तंभ के रूप में सांस्कृतिक संबंधों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। आईसीसीआर के मिशन के प्रति कुलपति के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए, उन्होंने रेखांकित किया कि कैसे भारत की सभ्यतागत विरासत आत्मविश्वास और गरिमा के साथ इसके अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को आकार दे रही है।
जोसेफ न्ये की ‘सॉफ्ट पावर’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए, उन्होंने बिना किसी विजय अभियान के विचारों, मूल्यों और ज्ञान प्रणालियों को साझा करने की भारत की दीर्घकालिक परंपरा पर जोर दिया।

‘वसुधैव कुटुंबकम’ और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे मौलिक सिद्धांतों पर बल देते हुए, उन्होंने भाषाओं, कला, संगीत, नृत्य और सिनेमा में भारत की विशाल सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ ‘वैक्सीन मैत्री’, विकास साझेदारी, छात्रवृत्ति और मानवीय सहायता जैसी पहल के माध्यम से भारत के समकालीन वैश्विक योगदान को रेखांकित किया।
उन्होंने मानवाधिकारों, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के साथ-साथ भारतीय ज्ञान में रचे-बसे योग, ध्यान और सचेत जीवन (माइंडफुलनेस) की बढ़ती वैश्विक गूँज का भी उल्लेख किया। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने इसे दुनिया भर में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-जन के जुड़ाव को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय अपने विविध अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के साथ सांस्कृतिक-संबंधों का एक सशक्त उदाहरण है।
अपने संबोधन के बाद, आईसीसीआर की महानिदेशक ने नालंदा विश्वविद्यालय में आईसीसीआर के विद्वानों के साथ संवाद किया, उनके प्रश्नों के उत्तर दिए और उन्हें परिषद की पहलों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने छात्रों से आईसीसीआर के साथ अपना जुड़ाव गहरा करने और ‘आईसीसीआर युवा मित्र’ तथा ‘कला साधक’ जैसे प्रमुख कार्यक्रमों में भाग लेने का आग्रह किया।
स्वागत भाषण में कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने सांस्कृतिक संबंधों, शैक्षणिक आदान-प्रदान और भारत के विकसित होते वैश्विक जुड़ाव के बीच बढ़ते अंतर्संबंधों पर विचार साझा किए। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की सहायता करने और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिवेश को मजबूत करने में आईसीसीआर द्वारा प्रदान की जाने वाली फेलोशिप की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने परिषद द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्तियों की सराहना करते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को और बल मिला है। उन्होंने अपने ‘नेट-जीरो’ परिसर के माध्यम से स्थिरता के प्रति नालंदा की प्रतिबद्धता की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के साथ पासपोर्ट कैंप जैसे हालिया सहयोगी प्रयासों का उल्लेख किया।
महानिदेशक ने नालंदा विश्वविद्यालय के ‘सहभागिता’ भागीदारों, जिनमें पड़ोसी गाँवों के किसान और महिलाएँ शामिल थीं, से भी बातचीत की और सामुदायिक जुड़ाव तथा समावेशी विकास में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने संकाय सदस्यों के साथ एक अलग बैठक की, जिसमें गहरे शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग के मार्गों पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के नेट-शून्य परिसर का अवलोकन किया तथा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता की।
