एकत्व की भावना से नालंदा की परंपरा तक: नालंदा विश्वविद्यालय पहुंचे भूटान के प्रधानमंत्री..

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@ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार (03 सितम्बर, 2025): राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय ने आज भूटान के प्रधानमंत्री दशो शेरिंग टोबगे, उनकी धर्मपत्नी तथा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी की। नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने भूटान के प्रधानमंत्री, उनके प्रतिनिधिमंडल तथा प्रथम महिला का हार्दिक स्वागत करते हुए उनके आगमन के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर छात्रों के साथ संवाद को प्रोत्साहित करने हेतु विश्वविद्यालय ने एक प्रतियोगिता भी आयोजित की, जिसमें 50 से अधिक प्रश्न प्राप्त हुए। इनमें से चुने गए प्रश्न भूटान के प्रधानमंत्री से पूछे गए, जिसका उन्होंने बहुत ही गर्मजोशी से उत्तर दिया।
प्रो. चतुर्वेदी ने नालंदा विश्वविद्यालय की एकत्व की दर्शन की अवधारणा को रेखांकित किया—प्रकृति के साथ एकत्व, विकास और स्थिरता के बीच संतुलन, तथा शांति एवं संघर्ष-रहित सह-अस्तित्व का मार्ग। उन्होंने इसे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के LiFE (Lifestyle for Environment) आह्वान से जोड़ा। उन्होंने भूटान के सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (Gross National Happiness) दर्शन का उल्लेख करते हुए बताया कि नालंदा भी सुख और कल्याण के अकादमिक मापदंडों पर शोध कर रहा है। उन्होंने भूटान की Mindfulness City पहल की तुलना नालंदा की ध्यान-आधारित शिक्षा परंपरा से की।
कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, “नालंदा शांति, ज्ञान और पारिस्थितिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। हमें भूटान के प्रधानमंत्री की मेज़बानी करने का सम्मान प्राप्त हुआ, जिनका सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता का दर्शन नालंदा की सामंजस्य और स्थिरता की भावना से गहराई से जुड़ा है।”

भूटान के प्रधानमंत्री दशो शेरिंग टोबगे ने अपनी धर्मपत्नी और प्रतिनिधिमंडल के साथ राजगीर और नालंदा आने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने भारत सरकार, बिहार सरकार और नालंदा विश्वविद्यालय को स्नेहपूर्ण आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि “अल-अजहर, बोलोनिया, ऑक्सफ़ोर्ड और पेरिस जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों से भी बहुत पहले, नालंदा महाविहार लगभग 2000 वर्षों तक विश्व का सबसे प्रमुख उच्च शिक्षा केंद्र रहा। यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं बल्कि विद्या और अध्यात्म का विशाल नगर था, जहाँ 10,000 से अधिक छात्र और विद्वान एक साथ निवास करते थे।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का नालंदा विश्वविद्यालय विविधतापूर्ण छात्र-शिक्षक समुदाय के माध्यम से उसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने छात्रवृत्ति, शैक्षणिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक साझेदारी को मज़बूत करने का प्रस्ताव रखा तथा नालंदा विश्वविद्यालय को भूटान में नवंबर में आयोजित होने वाले Global Peace Prayer Festival में भाग लेने का आमंत्रण दिया।
प्रधानमंत्री टोबगे ने नालंदा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “नालंदा केवल अतीत का विश्वविद्यालय नहीं है—यह शांति, एकता और अध्यात्म का शाश्वत दीपस्तंभ है, जो आज भी विश्व को प्रेरित करता है।”
अपने सम्बोधन में उन्होंने आगे बताया, “भूटान विश्व का एकमात्र वज्रयान बौद्ध राज्य है और हम नालंदा की उस ऐतिहासिक भूमिका को गहराई से स्मरण करते हैं जिसने हमारी परंपराओं को आकार दिया। भविष्य में नालंदा के साथ हमारे सहयोग इस बंधन को और मज़बूत करेंगे।”
भूटान के प्रधानमंत्री की इस यात्रा का समापन नालंदा विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ संवाद से हुआ, जिसने नालंदा की ज्ञान, संवाद और वैश्विक आदान-प्रदान की जीवंत परंपरा को पुनः स्थापित किया।
