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#bihar: नालंदा विश्वविद्यालय में 8वें इंडिया थिंक टैंक फोरम 2026 का शुभारंभ…

Bykhabretv-raj

Jan 12, 2026

 

 

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय में 8वें इंडिया थिंक टैंक फोरम 2026 का शुभारंभ…
विषय: बदलती दुनिया में भारत: आंतरिक सुदृढ़ता का निर्माण…

 

 

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: राजगीर, बिहार, 12 जनवरी 2026: नालंदा विश्वविद्यालय में आज ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन (ORF) के सहयोग से इंडिया थिंक टैंक फोरम (ITTF) 2026 के 8वें संस्करण का शुभारंभ हुआ. दो दिवसीय इस फोरम में देशभर के प्रमुख नीति-विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और संस्थागत प्रतिनिधि “बदलती दुनिया में भारत: आंतरिक सुदृढ़ता का निर्माण” विषय पर मंथन कर रहे हैं. यह विषय तेज़ी से बदलते वैश्विक परिदृश्य को दर्शाता है और इस बात पर ज़ोर देता है कि इन परिवर्तनों तथा उन पर भारत की प्रतिक्रियाओं को केवल अकादमिक दृष्टि तक सीमित न रखा जाए.

उद्घाटन सत्र में स्वागत वक्तव्य के दौरान वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु एकात्म दृष्टि और साझा उत्तरदायित्व की आवश्यकता पर बल दिया गया, जो नालंदा की संवाद और विमर्श की प्राचीन परंपरा से प्रेरित है.

“20 वर्ष: ब्रिक्स” विषय पर आयोजित विशेष संवाद सत्र में प्रो. सचिन चतुर्वेदी, कुलपति, नालंदा विश्वविद्यालय तथा डॉ. समीर सरन, अध्यक्ष, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के बीच विचार-विमर्श हुआ, जिसका संचालन डॉ. हर्ष वी. पंत, उपाध्यक्ष, ORF ने किया। इस चर्चा में आचार्य नागार्जुन, चतुष्कोटि (Tetralemma) और शून्यता की अवधारणा के माध्यम से प्राकृतिक और मानवीय विज्ञानों के बीच की दूरी को पाटने पर प्रकाश डाला गया.

वक्ताओं ने नालंदा की बौद्धिक परंपरा, वाद-विवाद संस्कृति के पुनर्जीवन, “ज्ञान भारतम्” के विमोचन, नालंदा विश्वविद्यालय पुस्तकालय की समृद्ध विरासत तथा जलवायु परिवर्तन और सततता को विश्वविद्यालय की मूल प्रतिबद्धता के रूप में रेखांकित किया.

ब्रिक्स, जलवायु वित्त, बहुपक्षीय विकास बैंकों और वैश्विक दक्षिण पर केंद्रित चर्चाओं में ब्राज़ील शिखर सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री के वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए सहयोग-आधारित लचीलापन, LiFE आंदोलन, वैज्ञानिक-सामाजिक उत्तरदायित्व और नवाचार-सततता के समन्वय पर जोर दिया गया।

उद्घाटन दिवस के प्रमुख निष्कर्ष,
• आंतरिक सुदृढ़ता का आधार: भारत की सुदृढ़ता बौद्धिक, नैतिक और संस्थागत एकीकरण में निहित है, जिसकी प्रेरणा नालंदा की ज्ञान परंपरा से मिलती है.
• वैश्विक दक्षिण के लिए ब्रिक्स: ब्रिक्स आत्मनिर्भरता से समावेशी विकास की ओर अग्रसर हुआ है, जिसके लिए सशक्त संस्थान, अनुसंधान और सहयोग अनिवार्य हैं.
• विचार से समाधान तक: थिंक टैंक, शिक्षाजगत और सामाजिक उद्यमों को मिलकर नैतिकता, सततता और उत्तरदायी नवाचार पर आधारित समाधान विकसित करने होंगे.

इंडिया थिंक टैंक फोरम 2026 के उद्घाटन दिवस का समापन नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ. इस दौरान उद्घाटन सत्र, विशेष संवाद एवं विषयगत चर्चाओं सहित कुल सात महत्वपूर्ण सत्र आयोजित हुए, जिन्होंने आगामी विमर्श के लिए बौद्धिक दिशा-निर्देश प्रदान किए. नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित यह फोरम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से देश-विदेश के प्रमुख थिंक टैंकों को नालंदा की सभ्यतागत विरासत और विचारधारा को समझने का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो रहा है.