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@bihar: एस. गुरुमूर्ति ने “मल्टीपोलर विश्व में आत्मनिर्भर भारत की ओर” विषय पर रखे विचार…

Bykhabretv-raj

Oct 14, 2025

 

 

 

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय लेक्चर सीरीज का उद्घाटन: एस. गुरुमूर्ति ने “मल्टीपोलर विश्व में आत्मनिर्भर भारत की ओर” विषय पर रखे विचार…

 

 

 

 

 

 

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ख़बरें Tv: पटना, बिहार, 14 अक्टूबर 2025: राजभवन–नालंदा विश्वविद्यालय लेक्चर सीरीज का प्रथम सत्र कल शाम राजभवन, पटना में आयोजित हुआ। प्रख्यात चिंतक और अर्थशास्त्री स्वामीनाथन गुरुमूर्ति ने इस सीरीज का पहला लेक्चर “आत्मनिर्भरता और MAGA इन ए मल्टीपोलर वर्ल्ड” विषय पर दिया।

लेक्चर सीरीज की शुरुआत नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी के स्वागत संबोधन से हुई। प्रोफेसर चतुर्वेदी ने सभी का हार्दिक स्वागत करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों और समाज के बीच वैचारिक सेतु के निर्माण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, यह लेक्चर सीरीज विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और बिहार के नागरिकों के बीच मासिक संवाद का एक सशक्त मंच बनेगी।

अपने सम्बोधन में एस. गुरुमूर्ति ने आज के वर्ल्ड ऑर्डर में चल रहे यूनिपोलर से मल्टीपोलर परिवर्तन की समीक्षा की तथा इस नई व्यवस्था को आकार देने में भारत की भूमिका पर अपने विचारों को साझा किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज अपनी जड़ों से कटने के संकट का सामना कर रहा है, और आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक स्वतंत्रता के रूप में नहीं, बल्कि सभ्यतागत आत्मचेतना के रूप में समझा जाना चाहिए। भारत की सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि, भारत का मूल आधार अधिकार-आधारित व्यवस्था पर नहीं, बल्कि कर्तव्य-आधारित व्यवस्था पर है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारत की सनातन ज्ञान परंपरा से शक्ति ग्रहण करें और आत्मबल को पहचानें।

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने, अपने अध्यक्षीय संबोधन में, भारत की दार्शनिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, उपनिषदों की दृष्टि में प्रत्येक प्राणी में दिव्यता निहित है, इसी भाव से मानवाधिकारों को देखा जाना चाहिए। उन्होंने महाभारत के विदुर का उल्लेख करते हुए कहा कि वे धर्मनिष्ठा और आत्मनिर्भरता के प्रतीक हैं, जो भारत की सभ्यतागत आत्मबल और नैतिक चेतना पर आधारित दृष्टि को दर्शाते हैं।

कुलपति प्रोफेसर चतुर्वेदी ने यह भी घोषणा की कि राजभवन–नालंदा विश्वविद्यालय लेक्चर सीरीज हर महीने आयोजित की जाएगी, जिससे शैक्षणिक संवाद और जनसंपर्क का एक सतत मंच तैयार होगा। प्रोफेसर चतुर्वेदी की यह पहल, बिहार के राज्यपाल की प्रेरणा और नालंदा विश्वविद्यालय के प्रयासों से साकार हो पायी है, जो विकसित बिहार और विकसित भारत के बौद्धिक और नैतिक ढांचे को गढ़ने की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है।

इस प्रथम लेक्चर-सीरीज का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय की उस सतत् यात्रा का भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सभ्यतागत गहराई और समकालीन प्रासंगिकता के साथ ज्ञान के प्रसार के लिए सदैव समर्पित है। इस अवसर पर बिहार के प्रख्यात शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा नालंदा विश्वविद्यालय के छात्रों की भागीदारी देखने को मिली।