July 14, 2024

ख़बरे टीवी – कला नगरी के रूप में विख्यात सरायकेला जिला कला में नित नए मुकाम को हासिल कर रहा है, अब तक इस कला में छह गुरुओं को पद्मश्री मिल चुका है, 2020 के लिए पद्मश्री से नवाजे जाने की घोषणा गुरु शशधर आचार्य को

सरायकेला जिला ही झारखण्ड का एक मात्र जिला है जहां झारखण्ड बनने के बाद छऊ में अब तक 6 गुरु लोगो को पद्मश्री मिल चूका है और इसी कड़ी मे इस साल छऊ नृत्य में शशधर आचार्य को पद्मश्री मिला है, मिलते है पूरे घर में ख़ुशी का माहौल है इनके घर में सभी लोग छऊ नृत्य करते है , देश बिदेश में इनके छऊ नृत्य की चर्चा होती है|

कला, नगरी के रूप में विख्यात सरायकेला जिला कला में नित नए मुकाम को हासिल कर रहा है, इसी भूमि से जन्मी और संपोषित हुई यह कला देश ही नहीं पूरे विश्व में अपनी खास पहचान बना कर रखा है, अब तक इस कला में छह गुरुओं को पद्मश्री मिल चुका है, उपलब्धि की इस फेहरिस्त में नया नाम गुरु शशधर आचार्य को वर्ष 2020 के लिए पद्मश्री से नवाजे जाने की घोषणा की गई है|

इस घोषणा के साथ ही सरायकेला में छऊ नृत्य प्रेमियों के बीच खुशी की लहर देखी जा रही है, सराय किला के लिए छऊ नृत्य कला कण – कण में बसा है, यही कारण है कि यहां लगभग हर घर में कोई न कोई छऊ कलाकार जरूर मिल जाता है , ऐसे गुरु तथा छऊ कलाकार अपनी कला का नमूना देश ही नहीं विदेशों में भी प्रदर्शित कर चुके हैं, आचार्य कलाकार एक ऐसा ही बड़ा नाम है 5 पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ाते हुए छऊ नृत्य गुरु शशधर आचार्य आज इस कला को नामचीन बनाने में लगातार जुटे हैं ,

5 वर्ष की आयु से ही इन्होंने छऊ कला नृत्य करना शुरू कर दिया था, कई गुरुओं के सानिध्य के साथ – साथ जवानी की दहलीज पार करते हैं, इन्होंने देश ही नहीं विदेशों में भी अपना प्रदर्शन किया आज आचार्य छवि चित्र संस्था के नाम पर यह सरायकेला के यह गुरु दिल्ली में नई पीढ़ियों को छऊ नृत्य की ट्रेनिंग देते है अपनी कला का ज्ञान हें| यह दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तथा पुणे के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया संस्थान में 20 वर्षों तक शिक्षक के रूप में अपना योगदान देते हैं,  छऊ कला में बेहतर प्रदर्शन के कारण ही इन्हें ढेरों पुरस्कार मिल चुके हैं और आज इनकी उपलब्धियों में एक स्वर्णिम उपलब्धि और भी जुड़ गई है और भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजे जाने की घोषणा की है, शशधर आचार्य 1990 से 1994 तक राजकीय नृत्य कला केंद्र निदेशक भी रहे थे|

हालांकि स्टडी लीव के कारण इन्होंने निदेशक का पद छोड़ दिया और वापस फिर कभी योगदान नहीं दिया . आज सुबह से बधाई का ताता देने वाले पहुंचने लगे है