द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन में नालंदा विश्वविद्यालय की सहभागिता….

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, 25 जनवरी 2026; नालंदा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने 24–25 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन में सहभागिता की। यह भागीदारी नालंदा की बौद्ध बौद्धिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं से ऐतिहासिक जुड़ाव को फिर से रेखांकित करती है।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में हुआ यह शिखर सम्मेलन ‘सामूहिक प्रज्ञा, संयुक्त स्वर और पारस्परिक सह-अस्तित्व’ विषय पर केंद्रित रहा। अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित विश्व के 200 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ भिक्षु, विद्वान और प्रमुख बौद्ध संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित हुए। उन्होंने अनुसंधान, चिकित्सा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा विज्ञान के क्षेत्रों में विश्व भर के गुरुओं व भिक्षुओं के साथ वैश्विक चुनौतियों के समाधान और उनके बेहतर प्रबंधन पर गहन चर्चा की।
सम्मेलन के दौरान प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने एच.ई. श्री ड्जगम्बिनोव ओचिर व्लादिमीरोविच (उप प्रमुख, गणराज्य काल्मिकिया, रूस), एच.ई. डॉ. ख्य सोवनरतना (राज्य सचिव, कंबोडिया सरकार), मोस्ट वेन. डॉ. थिच न्हात तू (स्टैंडिंग वाइस चांसलर, वियतनाम बौद्ध विश्वविद्यालय) तथा श्री अभिजीत हालदार (महानिदेशक, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ) सहित भारत और विश्व के प्रतिष्ठित भिक्षुओं व बौद्ध अध्ययन के विद्वानों से संवाद किया।

इन चर्चाओं में कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर भी विचार-विमर्श हुआ, जो भावी सहयोग को मजबूत करेंगे।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि नालंदा विश्व के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध शिक्षा केंद्रों में से एक रहा है। ऐसे वैश्विक संवाद हमें इस शाश्वत परंपरा को समकालीन चुनौतियों से जोड़ने तथा शांति, सह-अस्तित्व और साझा मानवीय मूल्यों के लिए सहयोग को मजबूत करने का अवसर देते हैं।
यह बौद्ध शिखर सम्मेलन कई महत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ताओं, विचारकों, विद्वानों, संघ के सदस्यों एवं धम्म के अनुयायियों को एक साझा मंच पर एकत्र करता है, जहाँ संवाद के माध्यम से करुणा, संयम और विवेक से उपजी सामूहिक समझ का स्वर बनती चर्चा को सार्थकता मिलती है। इस वैश्विक संवाद में नालंदा विश्वविद्यालय की सहभागिता उसकी शांत, सतत और जीवंत परंपरा को आगे बढ़ाती है—जिसने सदियों से ज्ञान और मैत्री के बंधन से विश्व को जोड़ा है, और आज भी मानवता की जटिल चुनौतियों के बीच संतुलन व आशा की राह दिखाती है।
