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#bihar: नालंदा विश्वविद्यालय–NHRC संवाद: मानवाधिकार शिक्षा एवं संस्थागत सर्वोत्तम प्रथाओं पर विमर्श..

Bykhabretv-raj

Aug 24, 2026

 

 

 

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय–NHRC संवाद: मानवाधिकार शिक्षा एवं संस्थागत सर्वोत्तम प्रथाओं पर विमर्श..

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार | सोमवार, 24 अगस्त 2026: नालंदा विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्पेशल मॉनिटर प्रोफेसर कन्हैया त्रिपाठी का आधिकारिक दौरा हुआ। इस अवसर पर मानवाधिकार शिक्षा, यूनिवर्सिटी-कार्यप्रणाली और समुदाय के साथ विश्वविद्यालय के जुड़ाव को और मजबूत करने पर केंद्रित संवाद किया गया।

परिसर पहुंचने पर प्रोफेसर त्रिपाठी का विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने संकायाध्यक्षों, शिक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संवाद किया। इस दौरान शैक्षणिक एवं संस्थागत प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, सतत विकास से जुड़ी पहल, सहभागिता कार्यक्रम तथा विविध अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के लिए उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी गई।

नालंदा विश्वविद्यालय ने विभिन्न देशों, संस्कृतियों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए एक समावेशी और संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के अपने प्रयासों को साझा किया। विद्यार्थियों की विभिन्न चिंताओं और समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय पारदर्शी एवं प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में भी निरंतर प्रयासरत है। इन पहलों, विश्वविद्यालय के नेतृत्व तथा अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की सुरक्षा, समानता और कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए प्रोफेसर त्रिपाठी ने नालंदा विश्वविद्यालय की व्यवस्थित शैक्षणिक कार्यप्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार शिक्षा के क्षेत्र में संस्थागत अच्छी कार्यप्रणालियों को साझा करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय एक मॉडल के रूप में काम कर सकता है।

संवाद के दौरान प्रोफेसर त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय में ‘ह्यूमन राइट्स क्लब’ शुरू करने तथा मानवाधिकार साक्षरता पर नियमित कार्यशालाएं और संगोष्ठियां आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने जेंडर इक्विटी, साइबर सुरक्षा एवं निजता, साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, जलवायु परिवर्तन और जल के अधिकार जैसे विषयों पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। उन्होंने विश्वविद्यालय की सहभागिता पहल की सराहना करते हुए वंचित और व्यापक समुदायों के साथ इसके जुड़ाव को और मजबूत करने का सुझाव दिया। साथ ही, विश्वविद्यालय की अच्छी पहलों और कार्यप्रणालियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण कर उन्हें NHRC के साथ साझा करने पर भी जोर दिया।

संवाद के दौरान मानवाधिकार विषय पर एक नई शोध पत्रिका शुरू करने तथा मानवाधिकार साक्षरता पर विशेष कार्यशाला आयोजित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मानवाधिकार और समावेशन के क्षेत्र में योगदान को सम्मानित करने के लिए विश्वविद्यालय में तीन नए पुरस्कार शुरू करने के प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रोफेसर त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय समुदाय और विद्यार्थियों को NHRC के उपलब्ध संसाधनों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के नेट-ज़ीरो परिसर का भी भ्रमण किया और इसकी विशिष्ट विशेषताओं तथा चल रही पहलों की जानकारी ली।