• Wed. May 20th, 2026

#bihar: नालंदा विश्वविद्यालय में “कौटिल्य ग्लोबल सेंटर फॉर स्टेट कैपेसिटी” का शुभारंभ…

Bykhabretv-raj

May 20, 2026

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय में “कौटिल्य ग्लोबल सेंटर फॉर स्टेट कैपेसिटी” का शुभारंभ…

 

 

 

 

ख़बरें टी वी : पिछले 16 वर्षो से ख़बर में सर्वश्रेष्ठ.. ख़बरें टी वी ” आप सब की आवाज ” …आप या आपके आसपास की खबरों के लिए हमारे इस नंबर पर खबर को व्हाट्सएप पर शेयर करें… ई. शिव कुमार, “ई. राज” -9334598481.

.. हमारी मुहिम .. नशा मुक्त हर घर .. बच्चे और नवयुवक ड्रग्स छोड़ें .. जीवन बचाएं, जीवन अनमोल है .. नशा करने वाले संगति से बचे ..

… हमारे प्लेटफार्म पर गूगल द्वारा प्रसारित विज्ञापन का हमारे चैनल के द्वारा कोई निजी परामर्श नहीं है, वह स्वतः प्रसारित होता है …

 

 

 

 

 

 

 

 

#ख़बरें Tv: प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने किया उद्घाटन; एशियाई बौद्धिक परंपरा एवं वैश्विक दक्षिण के अनुभवों पर आधारित सुशासन और राज्य क्षमता का वैश्विक मंच
राजगीर, नालंदा, बिहार | 20 मई 2026: नालंदा विश्वविद्यालय ने कल औपचारिक रूप से “कौटिल्य ग्लोबल सेंटर फॉर स्टेट कैपेसिटी” का शुभारंभ किया। यह केंद्र वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ ) के देशों में शासन, सार्वजनिक नीति तथा राज्य क्षमता से जुड़े अनुसंधान, संवाद और व्यवहारिक अध्ययन को समर्पित एक महत्वपूर्ण पहल है। राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस उद्घाटन सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, विद्वानों और प्रशासनिक विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा रहे। इस अवसर पर बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) तथा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) श्री रुद्रेंद्र टंडन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्य वक्तव्य देते हुए डॉ. पी. के. मिश्रा ने इस सेंटर की मूल भावना और उसके सभ्यतागत आधार को रेखांकित करते हुए कहा, “एशियाई बौद्धिक विरासत और वैश्विक दक्षिण के शासन अनुभवों से प्रेरणा लेते हुए यह सेंटर शासन संबंधी चिंतन की साझा वैश्विक क्षमता विकसित करने का प्रयास करे।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), आयुष्मान भारत, JAM ट्रिनिटी तथा मिशन कर्मयोगी जैसी पहलें भारत में एक सक्षम राज्य व्यवस्था के निर्माण के जीवंत प्रयोग हैं और यह सेंटर इन अनुभवों को विश्व समुदाय के लिए उपयोगी ज्ञान में परिवर्तित करने की अद्वितीय क्षमता रखता है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि ग्लोबल साउथ के अधिकांश देशों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती नीतियों की कमी नहीं, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों की वह सीमित क्षमता है, जिसके कारण नीतियों को निरंतर और व्यापक स्तर पर प्रभावी परिणामों में परिवर्तित नहीं किया जा पाता। उन्होंने कहा, “अंततः शासन एक नैतिक उपक्रम है और राज्य क्षमता नागरिकों की सेवा के लिए होती है। भारत की बौद्धिक परंपरा ने इस संबंध पर गंभीरता से विचार किया है और अब भारत इसे नए आत्मविश्वास और संस्थागत प्रतिबद्धता के साथ विश्व के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।”
कार्यक्रम में बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने विशेष संबोधन देते हुए भारत और विश्व के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों तथा नीति केंद्रों के बीच अधिक सशक्त सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान-नेटवर्क भविष्य की शासन प्रणालियों को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उद्घाटन कार्यक्रम में विश्व बैंक, गेट्स फाउंडेशन तथा कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन सहित अनेक प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।
विश्व बैंक के श्री हेमांग जानी ने केंद्र की व्यापक संभावनाओं और उसके वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला।
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने सहभागी संस्थानों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए केंद्र की बौद्धिक दृष्टि प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईस्ट एशिया समिट) की प्रक्रिया के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय का आधुनिक पुनरुत्थान इस सेंटर को एक जीवंत संस्थागत आधार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि नालंदा आज एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय है जिसके पास भारत, एशिया और व्यापक वैश्विक दक्षिण को शासन और राज्य क्षमता जैसे साझा विषयों पर एक साथ जोड़ने की बौद्धिक शक्ति, परिसर और संवाद क्षमता उपलब्ध है।
यह सेंटर विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली तथा गेट्स फाउंडेशन जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी में कार्य करेगा। भारत में यह मुख्य रूप से कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन तथा शासन और संस्थागत सुधार से जुड़े अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करेगा। इन संस्थागत सहयोगों के अतिरिक्त केंद्र दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के प्राथमिकता वाले देशों – श्रीलंका, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम आदि – के साथ अनुसंधान, तकनीकी आदान-प्रदान तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगा।