नालंदा विश्वविद्यालय में 25वें IASSI वार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ; सामाजिक विज्ञान के विद्वान और नीति-निर्माता हुए एकत्र..

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार | रविवार, 25 अक्टूबर 2026: आज नालंदा विश्वविद्यालय में ‘भारतीय सामाजिक विज्ञान संस्थाओं के संघ’ (IASSI) के 25वें वार्षिक सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ हुआ। 25 से 28 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के प्रतिष्ठित सामाजिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नीति-निर्माता समकालीन सामाजिक-आर्थिक विषयों पर विचार-विमर्श हेतु एकत्र हुए हैं। कार्यक्रम की शुरुआत आज आयोजित सम्मेलन-पूर्व संगोष्ठी (प्री-कॉन्फ्रेंस सिम्पोजियम) से हुई, जबकि सम्मेलन का मुख्य सत्र 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक संचालित होगा।
प्री-कॉन्फ्रेंस सिम्पोजियम: डेटा एवं शोध पद्धतियां
• सम्मेलन के प्रथम दिन विश्वामित्रालय सभागार में “आंकड़ा-संग्रह और शोध उपकरण: उभरती प्रवृत्तियां एवं चुनौतियां” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया:
• श्री सौरभ गर्ग (सचिव, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय): संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने प्रशासनिक अभिलेखों, मोबाइल डेटा, ई-कॉमर्स और भू-स्थानिक (geospatial) सूचनाओं की बढ़ती उपयोगिता को रेखांकित किया।
• प्रोफेसर रवींद्र एच. ढोलकिया (पूर्व प्राध्यापक, IIM अहमदाबाद): उन्होंने साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णयों के लिए सुदृढ़ शोध-पद्धति और भरोसेमंद आंकड़ों को अनिवार्य बताया।
• डॉ. एस. मधेश्वरन (सलाहकार, जैन यूनिवर्सिटी): उन्होंने भारत के सांख्यिकीय संसाधनों को प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेपों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया।
• प्रोफेसर एस. के. मोहंती (नालंदा विश्वविद्यालय): उन्होंने एमएसएमई (MSME) क्षेत्र और निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए एक पारदर्शी ‘ट्रेड डेटाबेस’ के गठन का सुझाव दिया।
• प्रोफेसर जी. सी. मन्ना (मानव विकास संस्थान) एवं प्रोफेसर उदय शंकर मिश्रा (IIPS मुंबई): उन्होंने सांख्यिकीय अनुमानों की सटीक व्याख्या और स्वास्थ्य संकेतकों के मानकीकरण पर विचार व्यक्त किए।
संगोष्ठी में सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में माना कि बेहतर फैसले लेने के लिए आंकड़ों की गुणवत्ता, उनकी पहुंच और शोध की शुद्धता बहुत ज़रूरी है।
औपचारिक उद्घाटन और पुस्तक विमोचन
संगोष्ठी के पश्चात् दीप प्रज्वलन की पारंपरिक विधि के साथ IASSI के 25वें वार्षिक सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी, अध्यक्ष, IASSI एवं कुलपति, नालंदा विश्वविद्यालय ने स्वागत एवं उद्घाटन संबोधन दिया। इसके बाद प्रोफेसर आलोक कुमार मिश्रा, सदस्य-सचिव, IASSI ने इस आयोजन के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। प्रोफेसर राम सिंह, 25वें IASSI वार्षिक सम्मेलन के अध्यक्ष एवं दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक ने अपने विचार रखे। इसके पश्चात् प्रोफेसर धनंजय सिंह, सदस्य-सचिव, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने संबोधन दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर एस. महेंद्र देव, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष ने “विकसित होते सामाजिक विज्ञान के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली” विषय पर उद्घाटन संबोधन दिया। इस अवसर पर शिवानी मिश्रा और आलोक कुमार मिश्रा द्वारा लिखित तथा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित पुस्तक Public Finance for Cities: The Benefit Principles from Wicksell to Stiglitz का विमोचन भी किया गया।
