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#bihar: नालंदा विश्वविद्यालय ने एक सप्ताह में किए तीन महत्वपूर्ण एमओयू, अकादमिक और सांस्कृतिक सहयोग का बढ़ा दायरा……

Bykhabretv-raj

Oct 2, 2026

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय ने एक सप्ताह में किए तीन महत्वपूर्ण एमओयू, अकादमिक और सांस्कृतिक सहयोग का बढ़ा दायरा
सीएसआईआर–ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी, हंगरी के धर्मा गेट बुद्धिस्ट कॉलेज और मैक्सिको के यूनिवर्सिदाद ऑटोनोमा द गेरेरो के साथ साझेदारियों से शोध, ज्ञान-विनिमय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को नई गति…

 

 

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार | शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026: नालंदा विश्वविद्यालय ने पिछले एक सप्ताह में भारत, हंगरी और मैक्सिको के संस्थानों के साथ तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर अपने अकादमिक और सांस्कृतिक सहयोग का दायरा और व्यापक किया है। ये साझेदारियां पारंपरिक ज्ञान, बौद्धिक संपदा अधिकार, बौद्ध एवं सांस्कृतिक अध्ययन, संयुक्त शोध, अकादमिक आदान-प्रदान तथा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसरों पर केंद्रित हैं।

तीन नए अकादमिक सहयोग (एमओयू)

1. CSIR-TKDL के साथ पारंपरिक ज्ञान पर सहयोग
30 सितंबर 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय ने सीएसआईआर–ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी यूनिट के साथ पारंपरिक ज्ञान, बौद्धिक संपदा अधिकार, जन-अधिकार और सांस्कृतिक विरासत, जिसमें पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां भी शामिल हैं, के क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किया।
एमओयू पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और CSIR-TKDL यूनिट की प्रमुख डॉ. विश्वजननी जे. सत्तिगेरी ने विश्वविद्यालय के राजगीर परिसर में हस्ताक्षर किए। इसके तहत संयुक्त शोध एवं अकादमिक गतिविधियों, प्रशिक्षण, विद्यार्थियों की इंटर्नशिप, ज्ञान-विनिमय और अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। साझेदारी के माध्यम से बिहार सहित भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के दस्तावेजीकरण और अध्ययन के अवसर भी विकसित होंगे।

2. धर्मा गेट बुद्धिस्ट कॉलेज, हंगरी के साथ अकादमिक एमओयू
30 सितंबर 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय ने धर्मा गेट बुद्धिस्ट कॉलेज, बुडापेस्ट, हंगरी के साथ अकादमिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और शोध सहयोग के लिए एमओयू किया।
इस साझेदारी में संयुक्त शोध पर्यवेक्षण, शिक्षण कार्यक्रम, पोस्ट-डॉक्टोरल शोध, सम्मेलन एवं संगोष्ठियां, अकादमिक प्रकाशन तथा शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान की संभावनाएं शामिल हैं। यह सहयोग बौद्ध अध्ययन और भारत से जुड़ी व्यापक बौद्धिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के क्षेत्र में अकादमिक संवाद को भी आगे बढ़ाएगा।

3. ग्युरेरो का स्वायत्त विश्वविद्यालय, मैक्सिको के साथ एमओयू
इससे पहले 24 सितंबर 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय ने मेक्सिको के ग्युरेरो राज्य में स्थित एक प्रमुख सार्वजनिक और स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थान, यूनिवर्सिदाद ऑटोनोमा द गेरेरो (ग्युरेरो का स्वायत्त विश्वविद्यालय), के साथ भारत और मैक्सिको के बीच अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किया।

समझौते के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध, सेमिनार एवं सम्मेलनों तथा अकादमिक जानकारी और प्रकाशनों के आदान-प्रदान के अवसर विकसित किए जाएंगे। ऑनलाइन आयोजित हस्ताक्षर समारोह में दोनों संस्थानों तथा मैक्सिको स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

आईसीसीआर के साथ दो-दिवसीय कार्यशाला: स्थानीय ज्ञान, सहभागिता और स्थिरता पर जोर
नालंदा विश्वविद्यालय में 3 और 4 अक्टूबर 2026 को “कला, कौशल और सहभागिता” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसका आयोजन भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR), क्षेत्रीय कार्यालय, पटना द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय और उसके सहभागिता साझेदारों के सहयोग से किया जा रहा है।

कार्यशाला में नालंदा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ कलाकार, शिल्पकार, स्वयं सहायता समूह और स्थानीय समुदाय के प्रतिभागी शामिल होंगे। विद्यार्थियों को पारंपरिक एवं स्थानीय ज्ञान, कला और स्थिरता के बीच संबंधों को समझने के साथ-साथ बांस, मिट्टी, पुआल और जूट जैसी स्थानीय सामग्रियों के उपयोग, पारंपरिक निर्माण तकनीकों, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण से जुड़ी व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को बिहार के स्थानीय ज्ञान और सामुदायिक परंपराओं से सीखने तथा उन्हें आज के समय की स्थिरता, रचनात्मकता और नवाचार के विचारों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

पिछले एक सप्ताह में हुए ये तीन एमओयू और आगामी कार्यशाला नालंदा विश्वविद्यालय के अकादमिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव के व्यापक विस्तार को दर्शाते हैं। इनके माध्यम से पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान को समकालीन शोध, शिक्षा और सांस्कृतिक संवाद से जोड़ने के साथ भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के संस्थानों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और समुदायों के बीच नए सहयोग के अवसर तैयार हो रहे हैं। नालंदा की समृद्ध ज्ञान परंपरा से प्रेरित विश्वविद्यालय अपने राजगीर परिसर को विचारों, ज्ञान और संस्कृतियों के निरंतर संवाद के एक जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।