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#bihar: महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नीतीश कुमार ने अकल्पनीय परिवर्तन करके दिखाया….

Bykhabretv-raj

Oct 2, 2026

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नीतीश कुमार ने अकल्पनीय परिवर्तन करके दिखाया:- मंत्री श्वेता गुप्ता

 

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: बिहार शरीफ के सम्राट अशोक भवन सोहडीह में नालंदा जिला महिला जनता दल यूनाइटेड के द्वारा जीविका के 20 साल पूरे होने के उपलक्ष्य पर पर आयोजित नीतीश संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता सांसद कौशलेंद्र कुमार उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष अनिता सिन्हा एवं संचालन बिहार शरीफ नगर महिला वीडियो अध्यक्ष निरंजन गुप्ता ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।इस अवसर पर
बिहार सरकार की मंत्री श्वेता गुप्ता ने कहा कि जब एक महिला सशक्त होती है, तो वह पूरे परिवार के सशक्तिकरण का आधार बनती है। आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर सामाजिक नेतृत्व की क्षमता में वृद्धि को “जीविका” ने साकार किया है नीतीश कुमार ने अपने शासन में महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। एक संवेदनशील सोच के साथ शुरू हुई सामाजिक बदलाव की इस यात्रा में आज हर दीदी की अपनी एक विशिष्ट कहानी है।हर कहानी में सफलता का एक अध्याय छिपा है। नीतीश जी के प्रयासों और महिलाओं की जीवटता से आज जीविका दीदियाँ सशक्त हुईं, हर परिवार सशक्त हुआ और बिहार की उन्नति का मार्ग प्रशस्त हुआ।विगत 20 वर्षों में जीविका ने हर बिहारवासी के जीवन में बदलाव की दस्तक दी है, करोड़ों महिलाओं को एक विशिष्ट पहचान दी है। बिहार के इस सामाजिक बदलाव के संवाहक नीतीश कुमार हैं, जिनकी दूरदर्शिता और विजन ने बिहार की हर महिला को एक नई पहचान दी है महिलाओं के विकास का सपना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी डॉ भीमराव अंबेडकर सरदार वल्लभभाई पटेल जननायक कर्पूरी ठाकुर जेपी और लोहिया ने देखा था उसे बिहार की धरती पर मूर्ति रूप देने का काम पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया है ग्राम पंचायत एवं नगर निकाय के चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देकर संवैधानिक पद पर बैठने का काम किया सरकारी नौकरियों में आरक्षण देकर हर विभागों में महिलाओं की भूमिका सुनिश्चित की बिहार देश का पहला राज्य है जहां राज्य पुलिस बल में सबसे ज्यादा महिलाओं की भागीदारी है बिहार की जीविका की सफलता का अनुसरण पूरे देश ने किया है। जीविका के इस सफल मॉडल को पूरे देश ने “आजीविका” के नाम से अपनाया। जीविका ने बिहार की महिलाओं को सशक्त बनाया है और आज आजीविका के माध्यम से देश की महिलाएँ सशक्त बन रही हैं।जीविका के इस गौरवमयी दो दशकों की स्वर्णिम यात्रा की बधाई और शुभकामनाएँ।नीतीश संवाद : ‘जीविका के 20 साल बेमिसाल’ — महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव को लेकर जदयू ने गिनाईं उपलब्धियां

2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर “नीतीश संवाद : जीविका के 20 साल बेमिसाल” शीर्षक से जारी सामग्री में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान जीविका कार्यक्रम के जरिए महिला सशक्तीकरण, रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हुए बदलाव का उल्लेख किया गया है।
जदयू की ओर से जारी सामग्री में कहा गया है कि महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में नीतीश कुमार के कार्यकाल में कई योजनाएं लागू की गईं। इनमें साइकिल योजना, पोशाक योजना, कन्या उत्थान योजना, पंचायती राज, नगर निकाय और प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में 50 प्रतिशत आरक्षण, सरकारी नौकरी और पुलिस में 35 प्रतिशत आरक्षण तथा महिला उद्यमी योजना जैसी योजनाओं का उल्लेख किया गया है।
2006 में हुई थी जीविका की शुरुआत
जदयू की सामग्री के अनुसार, वर्ष 2006 में जीविका कार्यक्रम की शुरुआत विश्व बैंक की सहायता से एक छोटे प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। इसके बाद इसे ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के माध्यम के रूप में विस्तार दिया गया। सामग्री में कहा गया है कि जीविका के माध्यम से गांवों में महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक भागीदारी में विस्तार हुआ।
जदयू का दावा है कि वर्तमान में बिहार में 13 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से एक करोड़ 88 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। सामग्री में कहा गया है कि स्वयं सहायता समूहों की संख्या बढ़कर 77 हजार से अधिक हो गई है और इन समूहों के तहत 11 लाख 84 हजार जीविका दीदियां जुड़ी हैं।
बैंकिंग सेवाओं तक महिलाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर
जदयू की ओर से जारी दस्तावेज में कहा गया है कि जीविका दीदियों की बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर भी काम किया गया है। सामग्री के मुताबिक, 6,749 बैंक सखियों द्वारा ग्राहक सेवा केंद्र खोले गए हैं। महिलाओं को स्वरोजगार में मदद करने के लिए 11 लाख 10 हजार स्वयं सहायता समूहों के बैंक खाते खोले जाने तथा उन्हें 75 हजार करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया गया है।
‘जीविका दीदी की रसोई’ और प्रशिक्षण कार्यक्रम
जदयू के अनुसार, जीविका दीदियों के हुनर को नए आयामों से जोड़ने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सामग्री में बताया गया है कि अस्पतालों, पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों और आवासीय विद्यालयों में 334 ‘जीविका दीदी की रसोई’ संचालित की जा रही हैं।
इसके अलावा, राज्य के 15 जिलों में 40 हजार से अधिक जीविका दीदियों को प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही गई है। दस्तावेज के अनुसार 332 प्रदेशों में ‘दीदी अधिकार केंद्र’ का संचालन किया जा रहा है, जहां महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी, कानूनी जागरूकता और सहायता उपलब्ध कराने का उल्लेख है।
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ाव
सामग्री के मुताबिक, जीविका दीदियां पशुधन गतिविधियों में भी भागीदारी कर रही हैं। इसमें कहा गया है कि 15 लाख 79 हजार समूह सदस्य पशुधन आधारित आजीविका से जुड़े हैं, जिनमें 8,700 पशु सखियां शामिल हैं।
जदयू के अनुसार, अररिया की समृद्धि उत्पादक कंपनी से 19,956 परिवार, जबकि कोसी प्रमंडल की कोशिकी दुग्ध उत्पादक कंपनी के 889 दुग्ध संग्रहण केंद्रों से 38,561 पशुपालक जुड़े हैं। इन केंद्रों से प्रतिदिन औसतन लगभग 72 हजार लीटर दूध संग्रहित किए जाने की बात कही गई है
कृषि क्षेत्र में भी जीविका की भूमिका
जदयू की सामग्री में बताया गया है कि जीविका के तहत 792 उत्पादक समूह एवं पांच उत्पादक कंपनियां गठित की गई हैं। करीब 4 लाख 98 हजार से अधिक परिवार आजीविका विकास से जुड़े होने का दावा किया गया है।
दस्तावेज के अनुसार, 11 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं मधुमक्खी पालन से जुड़ी हैं और इनके माध्यम से लगभग 4 हजार 340 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया गया है।
इसके साथ ही ‘आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना’ के तहत जरूरतमंद परिवारों को व्यावसायिक वाहन उपलब्ध कराने तथा स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए राज्य में 45 स्वास्थ्य सहायता केंद्र स्थापित किए जाने का उल्लेख किया गया है। बक्सर जिले में सेनेटरी नैपकिन निर्माण उद्योग को इसका उदाहरण बताया गया है।
महिला रोजगार के लिए ‘महिला रोजगार योजना’
जदयू की ओर से जारी सामग्री में कहा गया है कि जीविका से जुड़ी महिलाओं के स्वरोजगार के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की शुरुआत की गई। दस्तावेज के अनुसार, यह बिहार देश का पहला राज्य है जहां ऐसी योजना शुरू हुई।
सामग्री में कहा गया है कि योजना के तहत राज्य के प्रत्येक परिवार की एक पात्र महिला को स्वरोजगार हेतु 2 लाख 10 हजार रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान किया गया। इसमें दावा किया गया है कि अब तक एक करोड़ 81 लाख महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि प्रथम किस्त के रूप में हस्तांतरित की गई है, जबकि 61 हजार से अधिक लाभुकों के खातों में 20 हजार रुपये की दूसरी किस्त भी भेजी गई है।
सामाजिक बदलाव का भी किया गया उल्लेख
जदयू की सामग्री में जीविका दीदियों के माध्यम से महिलाओं की सामाजिक भूमिका में बदलाव का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि महिलाओं ने घर के कामकाज के साथ-साथ समूह संचालन, वित्तीय गतिविधियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया है।
सामग्री में यह भी कहा गया है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद जीविका दीदियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया। ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने का भी उल्लेख किया गया है।
‘जीविका’ को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बताया
जदयू की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि जीविका के 20 वर्षों के सफर ने ग्रामीण महिलाओं को केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी आगे बढ़ने के अवसर दिए हैं। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को इसकी सबसे बड़ी सामुदायिक ताकत बताया गया है।
सामग्री में कहा गया है कि ग्रामीण महिलाएं स्वयं अपने समूहों का संचालन कर रही हैं, बचत और ऋण की गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं, आजीविका के नए अवसर तलाश रही हैं और अपने गांव-समाज के निर्णयों में भागीदारी निभा रही हैं।
‘नीतीश संवाद : जीविका के 20 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम
जदयू के अनुसार, जीविका के 20 वर्षों की उपलब्धियों और इसके प्रभाव को आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से “नीतीश संवाद : जीविका के 20 साल बेमिसाल” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पार्टी की सामग्री में इसे ‘आधी आबादी’ के सम्मान और उपलब्धियों से जोड़ते हुए कहा गया है कि जीविका की उपलब्धियों को घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।जीविका के 20 वर्षों के दौरान महिला समूहों, स्वरोजगार, कृषि, पशुपालन, बैंकिंग और सामाजिक जागरूकता से जुड़े आंकड़ों और कार्यक्रमों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि जीविका के 20 साल ने बिहार में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अकल्पनीय परिवर्तन किया है 2005 के पहले बिहार की महिला घर से निकल नहीं पाती थी अब बिहार की महिला हर क्षेत्र के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। जीविका के 20 साल बिहार की महिला बनी शिक्षित आत्मनिर्भर विकसित और खुशहाल।गांधी के सत्य, स्वच्छता, ग्राम विकास, सामाजिक सुधार और अंतिम व्यक्ति के उत्थान के विचार आज भी जनकल्याण की राह दिखाते हैं।नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में इन आदर्शों को नीतियों और जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास हुआ है।सामाजिक सुधार से लेकर महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता और ग्रामीण विकास तक, यह यात्रा बापू के विचारों को व्यवहार में उतारने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नीतीश कुमार ने उनके विचारों को व्यावहारिक धरातल पर उतारा है।उनकी जयंती पर उनके प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि है।इस अवसर पर जदयू जिलाध्यक्ष मो अरशद प्रदेश प्रभारी कृष्णा रानी वर्मा प्रतिभा पटेल कंचन गुप्ता पूर्व अध्यक्ष वसुंधरा कुमारी अर्चना सिन्हा नूरसराय प्रमुख रेखा देवी उषा सिन्हा पिंकी देवी जीरो देवी प्रियंका कुमारी पूनम देवी अनिता गहलौत मीरा देवी इंदवाला कुशवाहा रंजू देवी चिन्ता देवी ललिता कुमारी सुनीता देवी प्रेमशीला कुमारी नीता कुमारी जूली कुमारी रानी देवी पासवान मीरा देवी तारामुनी देवी जानकी कुमारी सुनीता यादव रंजू कुमारी मारो देवी पूजा कुमारी सहित कई महिला जदयू कार्यकर्ता उपस्थित रहे।