लोगों को जागरूक करने के लिए नालंदा में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया…

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#ख़बरें Tv: नालन्दा – इसलामपुर के गाँधी मेमोरियल खनकाह ( जी एम के ) उच्च विद्यालय +2 इसलामपुर
में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली व बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार पटना के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार नालन्दा तथा अनुमण्डलीय विधिक सेवा समिति हिलसा के संयुक्त तत्वावधान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया ।
जो नालन्दा जिला
प्राधिकार के अध्यक्ष स ह जिला जज सुशांत कुमार व सचिव राजेश कुमार गौरव व अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति हिलसा के अध्यक्ष सह एडीजे वन आलोक कुमार पाण्डेय एवं सचिव सह अनुमण्डलीय न्यायायिक दण्डाधिकारी कुमारी सावित्री के संयुक्त मार्गदर्शन में पैनल लायर विजय कुमार एवं अनुमंडलीय लीगल एड क्लीनिक में प्रतिनियुक्त पी एलवी आलोक कुमार के कुशल नेतृत्व में विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया जिसका टॉपिक्स नालसा बच्चों के लिए बाल अनुकूल विधिक सेवाए योजना 2024 रहा /
सर्व प्रथम पीएलवी आलोक कुमार ने परिचय सत्र के दौरान नालसा प्राधिकार का गठन व उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि इसका गठन 1987 ई० में हुआ था / पर 9 नवम्बर 1995 से पूरे देश में लागू व संचालित है /
प्राधिकार का गठन का उद्देश्य आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गो को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करना तथा सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करना है / बच्चों को भी इस अधिनियम के अन्तर्गत निःशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार प्राप्त है /
पैनल अधिवक्ता विजय कुमार ने बताया कि इस योजना से लाभ कौन ले सकता है /
यह योजना निम्नलिखित बच्चों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है /
कानून से संघर्षरत बच्चे/
देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे /
पॉक्सो अधिनियम से संबंधित पीड़ित बच्चे /
बाल विवाह , बाल श्रम , एवं मानव तस्करी से प्रभावित बच्चे /
अनाथ , दिव्यांग, एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चे /
किसी भी कानूनी विवाद या न्यायिक प्रक्रिया में शामिल बच्चे /
योजना की प्रमुख विशेषताएं पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि निःशुल्क विधिक सहायता एवं अधिवक्ता उपलब्ध कराना/
बच्चो के अनुकूल वातावरण में परामर्श एवं कानूनी सहायता /
आवश्यकतानुसार मनो वैज्ञानिक एवं सामाजिक सहयोग /
प्रत्येक जिले में बच्चों के लिए विधिक सेवा इकाइयों के माध्यम से सहायता /
बच्चों की गोपनीयता एवं गरिमा का पूर्ण संरक्षण /
सहायता कैसे प्राप्त
किया जा सकता है /
यदि किसी बच्चे को कानूनी सहायता की आवश्यकता हो तो वह अपने माता – पिता , अभिभावक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकार या राज्य विधिक सेवा प्राधिकार से सम्पर्क किया जा सकता है /
आवेदन व्यक्ति गत रूप से या डाक या ऑनलाईन माध्यम से भी किया जा सकता है /
संवैधानिक मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य तथा बाल कानून 1986 जो बाल अधिनियम पारित किया गया जिसमें सारे देश में एक समान बाल अधिनियम लागू कर दिया गया है /
इस अधिनियम के अनुसार 16 वर्ष की आयु से कम के लड़के व 18 वर्ष की आयु से कम की लड़की द्वारा किये गये कानूनी विरोधी कार्यो को बाल अपराध कि श्रेणी में रखा गया है /
. अनुच्छेद 21 A के अनुसार राज्य में छः वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले सभी बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है /
अनुच्छेद 24 के अनुसार राज्य एवं भारत में चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या दुकान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जायेगा या किसी अन्य खतरनाक कार्य में नहीं लगाया जायेगा /
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सभी छात्राओं ने बाल अपराध , बाल शोषण , बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुरीतियों का विरोध करने का संकल्प लिया/
इस मौके पर प्राधानाध्यापक
संजय कुमार राय , के अलावे शिक्षक नीतेश कुमार , मो ० सरफराज इक्वाल , मो ० अफ्सार आलम , शुभम आनन्द , प्रशान्त कुमार , शु मैला हासमी( शिक्षिका)
