तिरंगा हाथ में, प्रकृति के बीच कदमताल—घोड़ा कटोरा से गिरियक जलाशय तक गूंजा राष्ट्रप्रेम का संदेश…
• ‘तिरंगा ट्रैक’ में 38 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा..
• राजगीर की प्राकृतिक सुंदरता और वन संपदा से हुए रूबरू..• कइयों के लिए ट्रैकिंग का अनुभव पहली बार था..
• सबने एक सुर में जिला प्रशासन और राजगीर, फॉरेस्ट रेंज को इस अविश्वसनीय याद के लिए धन्यवाद दिया…

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#ख़बरें Tv: राजगीर (नालंदा): स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जुड़ाव का अनूठा संदेश देते हुए आज सुबह राजगीर की हरी-भरी वादियों में ‘तिरंगा ट्रैक’ का आयोजन किया गया। सुबह 7:00 बजे घोड़ा कटोरा इको पार्क से शुरू हुई यह ट्रैकिंग इंद्रशाला गुफा होते हुए गिरियक जलाशय तक पहुँची। नालंदा वन प्रमंडल के राजगीर रेंज एवं जिला प्रशासन, नालंदा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कुल 38 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सुबह निर्धारित समय से पहले ही प्रतिभागी घोड़ा कटोरा इको पार्क में जुटने लगे थे। ट्रैकिंग के लिए अपना पंजीकरण कराने के बाद सभी प्रतिभागी खासे उत्साहित नजर आए। जैसे ही तिरंगा हाथों में लेकर ट्रैकिंग शुरू हुई, पूरा वातावरण देशभक्ति के उत्साह से भर उठा। प्रतिभागी जोश और उमंग के साथ प्राकृतिक पगडंडियों पर आगे बढ़ते रहे। इस दौरान महिला प्रतिभागियों की भी सक्रिय भागीदारी रही।
ट्रैकिंग के दौरान प्रतिभागियों ने राजगीर की खूबसूरत प्राकृतिक छटा, पहाड़ियों, हरियाली, वन क्षेत्र और रास्तों के मनोरम दृश्यों का भरपूर आनंद लिया। कई प्रतिभागियों के लिए यह जीवन का पहला ट्रैकिंग अनुभव था। वहीं कुछ ऐसे प्रतिभागी भी शामिल थे, जो पहले अन्य राज्यों में ट्रैकिंग कर चुके थे। उनके लिए राजगीर की पहाड़ियों और स्थानीय वन क्षेत्र में ट्रैकिंग करना एक अलग और विशेष अनुभव रहा।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, नालंदा, सुश्री सारा अशरफ ने ट्रैकर्स एवं मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हम चाहते थे कि हमारे युवा जाने कि नालंदा में, खासकर राजगीर की क्षेत्र में कितना कुछ है, कल्चर हेरिटेज से आगे प्राकृतिक संपदा कितना भरपूर है और वर्ड ऑफ माउथ के द्वारा लोगों के बीच में यह सच्चाई पहुंचे कि नालन्दा कोई साधारण स्थल नहीं है, बल्कि यहाँ की प्राकृतिक संपत्ति अद्वितीय है जो कहीं से भी कम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कई युवाओं के लिए ये अनुभव पहली बार होगा जो कि उन्हें अपने जल, जंगल और जमीन से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल ट्रैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय प्राकृतिक विरासत से जोड़ना भी है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा ट्रैकर्स की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ट्रैकिंग रूट पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं तथा मेडिकल टीम एवं आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
नालंदा के युवा ट्रेकर अनमोल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने इससे पहले उत्तराखंड में ट्रैकिंग की है, लेकिन राजगीर में ट्रैकिंग करना अपने आप में एक अनोखा रोमांच है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से अपने आसपास की वन संपदा, प्राकृतिक विरासत और राजगीर की खूबसूरती को नजदीक से जानने और समझने का अवसर मिलता है।
ट्रैकिंग के दौरान प्रतिभागी हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ते रहे और रास्ते में एक-दूसरे से संवाद करते हुए प्रकृति की खूबसूरती को करीब से महसूस करते रहे। बीच-बीच में ‘हर घर तिरंगा’, ‘स्वच्छ एवं हरित भारत’ तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे संदेशों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया गया। प्रतिभागियों के जोश और उत्साह से पूरा ट्रैकिंग मार्ग देशभक्ति की भावना से सराबोर रहा।
सहायक वन संरक्षक, नालंदा वन प्रमंडल, श्रीमती सिम्मी प्रियनैना ने कहा कि इस आयोजन को लेकर विभिन्न वर्गों के लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से लोगों को प्रकृति और पर्यावरण के साथ जोड़ने के साथ-साथ राजगीर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी पर्यावरण जागरूकता और प्रकृति से जुड़ी ऐसी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
‘तिरंगा ट्रैक’ के दौरान वन विभाग, जिला प्रशासन द्वारा प्रतिभागियों की सुविधा एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। कार्यक्रम की पूरी यात्रा के दौरान मीडिया प्रतिनिधि भी मौजूद रहे तथा ट्रैकिंग के विभिन्न पड़ावों से कार्यक्रम की कवरेज की गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एवं लाइव माध्यमों के जरिए भी इस अनूठी पहल को लोगों तक पहुंचाया गया।
यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि राष्ट्रप्रेम केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने देश की प्राकृतिक संपदा, वन, जल, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना भी राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
पूरे ट्रैकिंग में उप विकास आयुक्त, नालंदा सुश्री सारा अशरफ, सहायक वन संरक्षक, नालंदा वन प्रमंडल, श्रीमती सिम्मी प्रियनैना, रेंज अधिकारी, राजगीर रेंज, श्री श्याम कुमार पांडे, डायरेक्टर डीआरडीए, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, नालंदा सहित वन विभाग एवं जिला प्रशासन के पदाधिकारी एवं कर्मी टीम के साथ चले।
