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#bihar: भूदान दिवस पर रचनात्मक समाज बनाने की प्रेरणा ले- दीपक भाई

Bykhabretv-raj

Apr 18, 2026

 

 

 

 

भूदान दिवस पर रचनात्मक समाज बनाने की प्रेरणा ले- दीपक भाई

 

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv : भूदान दिवस 18 अप्रैल के मौके पर एकता नेशनल यूथ अवार्ड से सम्मानित तथा सद्भावना मंच (भारत )ए के संस्थापक दीपक कुमार ने विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य विनोबा भावे भूदान आंदोलन के प्रणेता के रूप में याद किए जाते है।
भूदान आंदोलन (1951) के तहत आचार्य विनोबा भावे को पूरे देश में कुल 44 लाख एकड़ से अधिक जमीन दान में मिली थी, जिसमें से लगभग 13 लाख एकड़ जमीन भूमिहीन गरीबों में वितरित की गई थी। यह एक स्वैच्छिक भूमि सुधार आंदोलन था, जिसे रक्तहीन क्रांति के रूप में भी जाना जाता है।
भूदान दिवस 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसी दिन 1951 में विनोबा भावे ने तेलंगाना के पोचमपल्ली गांव में पहला भूदान लिया था।विनोबा भावे तेलंगाना में पदयात्रा कर रहे थे। पोचमपल्ली गांव के हरिजनों ने कहा – “हमें 80 एकड़ जमीन मिल जाए तो हम मेहनत से पेट भर लेंगे।” विनोबा ने गांवसभा में पूछा – “क्या कोई भाई अपनी जमीन में से देगा?” रामचंद्र रेड्डी नाम के किसान खड़े हुए और 100 एकड़ जमीन दान कर दी। यहीं से भूदान आंदोलन शुरू हुआ। हिंसा के बिना, कानून के बिना, सिर्फ हृदय-परिवर्तन से भूमि-सुधार।
अहिंसक क्रांति का प्रतीक
दुनिया को दिखाया कि जमीन का बंटवारा बंदूक या सरकार के बिना भी हो सकता है – सिर्फ करुणा और अपील से।
ग्राम-स्वराज की नींव

विनोबा का लक्ष्य था – “सब भूमि गोपाल की”। भूदान के बाद ग्रामदान आया, यानी पूरा गांव अपनी जमीन समाज को सौंप दे।
शिक्षा का संदेश भूदान कार्यकर्ता गांव-गांव गए। उन्होंने आचार्यकुल जैसे प्रयोग शुरू किए ताकि दान में मिली जमीन पर नए आचारवान किसान-नागरिक तैयार हों।
आज के लिए प्रासंगिक है कि जमीन का असमान बंटवारा, किसान आत्महत्या, पलायन – इन सबका हल “मालिक नहीं, ट्रस्टी” की भावना में है। यही भूदान का मूल है।
विनोबा कहते थे – “भूदान का मतलब सिर्फ जमीन देना नहीं है।” इसके 5 दान थे:
. भू-दान – जमीन
. श्रम-दान – मेहनत
बुद्धि-दान – ज्ञान
संपत्ति-दान – पैसा
जीवन-दान – पूरा जीवन समाज के लिए
भूदान दिवस इन पांचों को याद करने का दिन है।यह दिवस मनाने के लिए श्रमदान करना चाहिए 1 घंटा स्कूल का बगीचा, या गांव की सफाई। विनोबा कहते – “दान वही जो हाथ से हो।”
पोचमपल्ली की कहानी बच्चों को सुनाना चाहिए । फिर उनसे पूछें – “अगर तुम्हारे पास 10 बीघा हो तो क्या करोगे?”
विनोबा का एक वाक्य “भूदान ने भूमि का प्रश्न हल नहीं किया, पर मनुष्य के मन का प्रश्न खोल दिया – क्या हम बांटकर जी सकते हैं?”18 अप्रैल को आचार्यकुल में, सर्व सेवा संघ के केंद्रों पर और कई गांधी-विनोबा संस्थाओं में भूदान दिवस पर प्रार्थना, पदयात्रा और संगोष्ठी होती हैं।