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#bihar: नालंदा विश्वविद्यालय में दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र (CSEAS) का शुभारंभ..

Bykhabretv-raj

Apr 1, 2026

 

 

 

 

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय में दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र (CSEAS) का शुभारंभ..

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: राजगीर, बिहार (01 अप्रैल 2026): नालंदा विश्वविद्यालय ने 31 मार्च को अपने परिसर में दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र (CSEAS) का उद्घाटन कर एक नए अध्याय की शुरुआत की। भारत और आसियान (ASEAN) देशों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूती देने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेष बात यह रही कि इस केंद्र का शुभारंभ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के सफल समापन के तुरंत बाद हुआ, जिसने इस अवसर के गौरव को दोगुना कर दिया।

CSEAS की स्थापना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसकी घोषणा उन्होंने अक्टूबर 2025 में 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान की थी। यह केंद्र ज्ञान के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संवाद के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत के गहरे जुड़ाव की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस केंद्र का उद्घाटन भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ राजनयिक और यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त श्री पेरियासामी कुमरन द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-आसियान संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में शैक्षणिक संस्थान एक मजबूत सेतु का कार्य कर सकते हैं और नालंदा इस भूमिका के लिए सर्वथा उपयुक्त है। समारोह में अंतरराष्ट्रीय जगत की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें शामिल थे:
• दातो’ सेरी अहमद ज़ाहिद हमीदी, उप प्रधानमंत्री, मलेशिया
• श्री कार्लिटो नुन्स, भारत में तिमोर-लेस्ते के पहले निवासी राजदूत
• गुयेन मिन्ह हैंग, उप विदेश मंत्री, वियतनाम
• सोखोन प्राक, राज्य सचिव (विदेश मंत्रालय), कंबोडिया
• फोंगसावन सिसौलाथ, उप विदेश मंत्री, लाओ पीडीआर
इनके साथ ही भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और विश्वविद्यालय के नेतृत्व ने भी इस मील के पत्थर पर अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केंद्र भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को एक मजबूत शैक्षणिक और बौद्धिक आधार प्रदान करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र (CSEAS) न केवल शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयां भी देगा। साथ ही, यह केंद्र समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने में भी अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।

यह नवनिर्मित केंद्र दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न पहलुओं जैसे—संस्कृति, अर्थव्यवस्था, शासन, समुद्री अध्ययन और विरासत—पर शोध को बढ़ावा देगा। इसका लक्ष्य केवल अकादमिक चर्चा तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए एक साझा मंच तैयार करेगा।

प्राचीन काल में नालंदा जिस प्रकार वैश्विक ज्ञान और बौद्धिक विनिमय का केंद्र हुआ करता था, यह नई पहल उसी गौरवशाली परंपरा को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करने का प्रयास है। यह केंद्र आने वाले समय में भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच ऐतिहासिक कड़ियों को जोड़ते हुए क्षेत्रीय सहयोग के नए द्वार खोलेगा।