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#bihar: नालंदा विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस: युवाशक्ति, वैश्विक जुड़ाव और समावेशी ज्ञान पर जोर…

Bykhabretv-raj

Aug 15, 2026

 

 

 

 

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस: युवाशक्ति, वैश्विक जुड़ाव और समावेशी ज्ञान पर जोर…

 

 

 

 

 

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#ख़बरें TV: राजगीर, नालंदा, बिहार | शनिवार, 15 अगस्त 2026: नालंदा विश्वविद्यालय में भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित किया। समारोह में विश्वविद्यालय के वैश्विक छात्र समुदाय, शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी, सहभागिता से जुड़े साझेदारों सहित नालंदा विश्वविद्यालय का पूरा समुदाय शामिल हुआ।

अपने संबोधन में कुलपति ने विश्वविद्यालय के बढ़ते अकादमिक और अंतरराष्ट्रीय विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय ने अब 1,000 विद्यार्थियों की संख्या का आंकड़ा पार कर लिया है। वर्तमान में विश्वविद्यालय में 35 देशों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि इस वर्ष 72 देशों से आवेदन प्राप्त हुए। उन्होंने भारत के भविष्य के निर्माण में युवाशक्ति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए युवाओं को “भारत के भविष्य के वास्तुकार” के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल अकादमिक गतिविधियों तक सीमित न रहने, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रशासन, संचालन और व्यापक सामाजिक जिम्मेदारियों में भी सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

विकसित भारत @2047 के संदर्भ में प्रोफेसर चतुर्वेदी ने कहा कि भारत की विकास यात्रा का लाभ उसके ग्लोबल साउथ के साझेदार देशों तक भी पहुंचना चाहिए। उन्होंने इस दृष्टि को नालंदा की सभ्यतागत विरासत से जोड़ते हुए कहा कि सदियों पहले नालंदा में ज्ञान भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर साझा, विकसित और सह-निर्मित होता था। ज्ञान के माध्यम से दुनिया को जोड़ने और आपसी सहभागिता की यह भावना समकालीन वैश्वीकरण की अवधारणा से बहुत पहले नालंदा की परंपरा का हिस्सा रही है।

कुलपति ने आने वाले समय के लिए विश्वविद्यालय की कई अकादमिक और संस्थागत प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया। इनमें शोध क्लस्टरों और फैकल्टी कोलोक्वियम के माध्यम से अंतर-विषयक अकादमिक सहयोग को मजबूत करना, विद्यार्थियों की शोध में अधिक भागीदारी, चुनिंदा विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सेमेस्टर एक्सचेंज, विद्यार्थियों के नेतृत्व में अकादमिक जर्नल और वैश्विक साझेदारों के साथ व्यापक जुड़ाव शामिल हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के विस्तार होते अकादमिक दायरे का उल्लेख करते हुए साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी स्टडीज, डेटा साइंस एंड एआई तथा संस्कृत के नए कार्यक्रमों के साथ 27 अल्पकालिक कार्यक्रमों और 54 वैकल्पिक पाठ्यक्रमों की जानकारी दी।

 

 

अपने संबोधन में सहभागिता और समाज के साथ विश्वविद्यालय के जुड़ाव को भी विशेष महत्व दिया गया। प्रोफेसर चतुर्वेदी ने कहा कि परिसर से बाहर समुदायों के साथ विश्वविद्यालय का जुड़ाव विद्यार्थियों में सामाजिक प्रतिबद्धता, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने वाला होना चाहिए। उन्होंने LEAP 2.0 का भी उल्लेख किया, जिसके लिए इस वर्ष 40 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सहयोग प्रदान करने के साथ-साथ विश्वविद्यालय और आसपास के समुदायों के लिए सार्थक स्वैच्छिक योगदान को प्रोत्साहित करना है।

कुलपति ने तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने विषयों की सीमाओं से आगे बढ़कर उभरती भू-राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को शोध, कौशल विकास और व्यावहारिक सीखने में योगदान देना चाहिए। साथ ही, विद्यार्थियों को सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध सूचनाओं को लेकर अधिक सजग और आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह के तहत “विश्व न्याय, शांति और सतत विकास : विश्वविद्यालयों की भूमिका” विषय पर विशेष पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने की। चर्चा में प्रोफेसर थॉमस पोगे, फाउंडिंग डायरेक्टर, ग्लोबल जस्टिस प्रोग्राम एवं लेटनर प्रोफेसर ऑफ फिलॉसफी एंड इंटरनेशनल अफेयर्स, येल विश्वविद्यालय; श्री एरिक सोलहाइम, नॉर्वे के पूर्व पर्यावरण एवं अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री; प्रोफेसर अमिताभ मट्टू, डीन, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली; तथा प्रोफेसर अंजू शरण उपाध्याय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने भाग लिया। चर्चा में न्याय, शांति, स्थिरता और बदलती वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।

समारोह में नालंदा विश्वविद्यालय के विभिन्न देशों से आए विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाया। अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और परंपराओं से आए विद्यार्थियों की इस सहभागिता ने समारोह को विशेष रंग दिया।