भारत–पुर्तगाल संबंधों के 50 वर्ष: नालंदा विश्वविद्यालय में नई संभावनाओं का संवाद..

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार | 11 अप्रैल 2026: भारत और पुर्तगाल के आधुनिक कूटनीतिक संबंधों के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नालंदा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय भारत–पुर्तगाल संवाद: कूटनीति, संस्कृति, भाषा एवं सतत भविष्य का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों के कई डिप्लोमेट्स, स्कॉलर्स और पालिसी एक्सपर्ट्स हिस्सा ले रहे हैं।
इस डायलाग के प्रथम दिन, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव (पश्चिम) राजदूत सिबी जॉर्ज सहित भारत और पुर्तगाल से पधारे सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए शैक्षणिक सहयोग, शोध साझेदारी और विचारों के सतत आदान-प्रदान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने संस्थागत और सरकारी स्तर पर द्विपक्षीय सहयोग को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
अपने विशेष संबोधन में भारत में पुर्तगाल के राजदूत श्री जोआओ रिबेरो डी अल्मेडा ने दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों और पीपल-टू-पीपल कनेक्ट को विस्तार से रखा। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि का उल्लेख किया।
यूनिवर्सिदादे दोस अजोरेस के वाइस-रेक्टर डॉ. फ्रांसिस्को मार्टिन्स ने विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी, संयुक्त शोध तथा शिक्षक एवं छात्रों के आदान-प्रदान को दीर्घकालिक सहयोग का प्रमुख आधार बताया।
मुख्य वक्तव्य देते हुए राजदूत सिबी जॉर्ज ने भारत और यूरोप, विशेष रूप से पुर्तगाल के साथ गहरे सभ्यतागत संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राजनीतिक सहभागिता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्रगति तथा जन-से-जन संबंधों की गहराई का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को विशेष रूप से सबके समक्ष रखा। साथ ही, उन्होंने भारत–यूरोपीय फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, रक्षा सहयोग और साझा भविष्य दृष्टि का भी उल्लेख किया।
उद्घाटन सत्र में हिंदी–पुर्तगाली–हिंदी शब्दकोश (द्वितीय संस्करण) का विमोचन भी किया गया।
संवाद के अंतर्गत चार विषयगत सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें भारत–यूरोपीय संघ संबंध, साझा इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत, सतत विकास एवं व्यापार संबंध तथा भाषाई सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
समापन सत्र में अपने विशेष वर्चुअल संबोधन में पुर्तगाल में भारत के राजदूत श्री पुनीत आर. कुंडल ने नालंदा विश्वविद्यालय के संदर्भ में पुर्तगाल की विशिष्ट भूमिका को रेखांकित करते हुए इसे यूरोपीय संघ का एकमात्र हस्ताक्षरकर्ता देश बताया। उन्होंने कूटनीति, शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्रों में भारत–पुर्तगाल संबंधों की गहराई को रेखांकित किया तथा प्रमुख समझौतों के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि का उल्लेख किया। प्रो. सचिन चतुर्वेदी के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने पुर्तगाली विश्वविद्यालयों के विद्वानों को एक मंच पर लाने की पहल को महत्वपूर्ण बताया और नालंदा विश्वविद्यालय के पुनः वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उभरने पर विश्वास व्यक्त किया, जिसमें पुर्तगाल की महत्वपूर्ण साझेदारी होगी।
इस डायलाग के दौरान, नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, पटना द्वारा विदेश मंत्रालय की “पासपोर्ट सेवा – आपके द्वार” पहल के अंतर्गत पासपोर्ट सेवा मोबाइल वैन शिविर का भी आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्घाटन सचिव (पश्चिम) श्री सिबी जॉर्ज तथा कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह पहल विश्वविद्यालय समुदाय के लिए आवश्यक पासपोर्ट सेवाओं को सुलभ बनाते हुए नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करने का काम करती है।
