नालंदा विश्वविद्यालय में नेट-ज़ीरो कोर्स का समापन…

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#ख़बरें Tv : राजगीर, नालंदा (29 दिसंबर, 2025): नालंदा विश्वविद्यालय में आज पांच-दिवसीय “नेट-ज़ीरो स्ट्रेटेजी एग्जीक्यूटिव सर्टिफिकेट कोर्स” का सफलतापूर्वक समापन हुआ. राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के नेट-ज़ीरो परिसर में आयोजित इस कोर्स ने कई पालिसी निर्माताओं, सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारियों, सस्टेनेबिलिटी डेवलपमेंट एक्सपर्ट, आर्किटेक्ट्स और प्रोफेशनल्स को एक साझा मंच पर लाने का काम किया.
इस आवासीय कोर्स के उद्घाटन सत्र में, 25 दिसंबर को नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी, ‘जल पुरुष’ के नाम से विख्यात मैग्सेसे पुरस्कार विजेता डॉ. राजेंद्र सिंह, ‘सोलर मैन ऑफ इंडिया’ प्रो. चेतन सिंह सोलंकी, वास्तुविद् श्री राजीव कठपालिया, तथा सुश्री अपूर्वा चतुर्वेदी, सदस्य, नेट-ज़ीरो स्टीयरिंग कमेटी, सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही. भारत सहित विदेशों से आए प्रतिभागियों ने प्रोग्राम को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया.
इस प्रोग्राम के पहले दिन डॉ. राजेंद्र सिंह जी द्वारा “नेट-ज़ीरो के लिए जल” विषय पर एक सार्वजनिक व्याख्यान दिया गया, जिसमें उन्होंने जल और जलवायु के गहरे अंतर्संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि “जल ही जलवायु है और जलवायु ही जल है.” उनके संबोधन में सामुदायिक जल संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और जल-सुरक्षा की केंद्रीय भूमिका पर विशेष बल दिया गया. कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने अपने उद्घाटन सत्र में सभी प्रतिभागियों का नालंदा परिसर में स्वागत किया और उन्हें सम्बोधित करते हुए कहा, “नालंदा का नेट-ज़ीरो दृष्टिकोण केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत दायित्व है. प्राचीन नालंदा महाविहार की परंपरा से प्रेरित होकर, यह पहल ज्ञान, नैतिकता और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के समन्वय का प्रयास है.”
यह कार्यक्रम ऊर्जा, जल, अपशिष्ट प्रबंधन, गतिशीलता, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा व्यावहारिक परिवर्तन जैसे विषयों पर समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने के उद्देश्य से संरचित किया गया था, ताकि प्रतिभागी प्रभावी नेट-जीरो रोडमैप विकसित कर सकें. सत्रों का संचालन डॉ. राजेंद्र सिंह, प्रो. चेतन सिंह सोलंकी, सुश्री अपूर्वा चतुर्वेदी, श्री राजीव कठपालिया, श्री उपेंद्र त्रिपाठी, डॉ. जय प्रकाश, गुर्नीत सिंह तथा नालंदा विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और विशेषज्ञों द्वारा किया गया.
विश्वभर से प्राप्त 150 से अधिक आवेदनों में से सरकारी, कॉर्पोरेट, शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्रों के 50 चुनिंदा प्रतिनिधियों को इस आवासीय कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया. ‘नेट-जीरो स्ट्रेटेजी पर एग्जीक्यूटिव कोर्स’ नालंदा विश्वविद्यालय की सतत विकास, जलवायु नेतृत्व तथा नैतिक पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है, तथा विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर आदर्श नेट-जीरो शैक्षणिक परिसर के रूप में स्थापित करने में योगदान देता है.
