नालंदा विश्वविद्यालय और सीएसआईआर के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू)..
विज्ञान आधारित सतत विकास, प्रौद्योगिकी प्रसार और ग्रामीण परिवर्तन को मिलेगा नया आयाम..

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#ख़बरें Tv: नई दिल्ली/राजगीर | बुधवार, 22 जुलाई 2026: नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय (अनुसंधान भवन) में आज नालंदा विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी विज्ञान-आधारित सतत विकास, प्रौद्योगिकी प्रसार, ग्रामीण परिवर्तन, कौशल विकास तथा वैज्ञानिक जनसंपर्क को नई गति प्रदान करेगी। इसका उद्देश्य सीएसआईआर की स्वदेशी वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों को नालंदा विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक परिवेश से जोड़ते हुए समाज-केंद्रित विकास के ऐसे मॉडल विकसित करना है, जिन्हें व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके और जिनके माध्यम से भारतीय वैज्ञानिक नवाचारों को वैश्विक पहचान मिले।
समझौते का आदान-प्रदान नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी; सीएसआईआर की महानिदेशक एवं वैज्ञानिक डॉ. एन. कलैसेल्वी, तथा विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव (ईस्ट) श्री रुद्रेन्द्र टंडन की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक एवं संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने विज्ञान की सामाजिक उपयोगिता पर बल देते हुए कहा कि नई प्रौद्योगिकियों का विकास जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना भी है कि वे समाज की वास्तविक आवश्यकताओं तक पहुँचें। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर के साथ यह सहयोग नालंदा क्षेत्र में सतत विकास को गति देगा। इसके अंतर्गत आदर्श ग्राम विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों के उपयोग के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के साथ विश्वविद्यालय की सहभागिता को और मजबूत किया जाएगा।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) श्री रुद्रेन्द्र टंडन ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप नालंदा विश्वविद्यालय को एक विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग का सशक्त केंद्र बने। उन्होंने कहा कि भारत के अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान सीएसआईआर के साथ यह साझेदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सीएसआईआर की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आसपास के समुदायों को व्यापक लाभ मिलेगा।
सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने इस अवसर को दोनों संस्थानों की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया और एमओयू को साकार करने में योगदान देने वाले सभी प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय की विविध अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय की उपस्थिति भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को विश्व स्तर तक पहुँचाने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करती है।
अंतरविषयक दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. कलैसेल्वी ने कहा कि वैज्ञानिक नवाचारों को समाज तक प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए सामाजिक विज्ञान की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सीएसआईआर की कई मिशन आधारित प्रौद्योगिकियों और पहलों—जैसे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, मृदा सुधार, जल गुणवत्ता सुधार और सामाजिक उपयोगिता से जुड़े कार्यक्रमों—का उल्लेख किया, जिन्हें नालंदा विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के गांवों में लागू किया जा सकता है। उन्होंने इस सहयोग के प्रारंभिक चरण में कम से कम तीन प्रमुख सामाजिक मिशनों को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, ताकि क्षेत्र में इनके ठोस और मापनीय परिणाम दिखाई दे सकें।
इस साझेदारी के अंतर्गत नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में सीएसआईआर टेक्नोलॉजी गैलरी की स्थापना की जाएगी। इस गैलरी में सीएसआईआर की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, वैज्ञानिक नवाचारों तथा प्रायोगिक मॉडलों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह गैलरी विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, अंतरराष्ट्रीय विद्वानों और आगंतुकों के लिए भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों से परिचित होने का एक सशक्त मंच बनेगी।
समझौते के तहत कृषि अवशेष एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रौद्योगिकियों के उपयोग के साथ-साथ राजगीर क्षेत्र में नालंदा विश्वविद्यालय की ‘सहभागिता संवाद’ पहल के अंतर्गत गांवों में कौशल विकास और आजीविका संवर्धन कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में पुष्पोत्पादन, औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, कृषि प्रसंस्करण, ग्रामीण उद्यमिता तथा अन्य मिशन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
