हरनौत में बारिश से भूजल स्तर सुधराः बिहारशरीफ प्रमंडल के 11 प्रखंडों में 2900 से अधिक हैंडपंपों की मरम्मत…

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#ख़बरें Tv: हरनौत: आमतौर पर गर्मी के मौसम में भूजल स्तर गिर जाता है, लेकिन मानसून के दौरान नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश से भूजल स्तर में सुधार हुआ है।लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) से मिली जानकारी के अनुसार,जुन-जुलाई महीने में इस साल भूजल स्तर में उतना ज्यादा गिरावट नहीं हुआ है।पीएचईडी के कनिय अभियंता(जेई) सुप्रिया कुमारी ने कहा कि इस साल पानी समय समय पर होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर बहुत तेजी से नीचे नहीं गया।जुलाई माह में रूक-रूक बारिश हो जाने के कारण भूजल स्तर मेंटेन है।जेई ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का सामान्य भूजल 25 से 30 फुट होना चाहिए। वर्तमान में भूजल का स्तर 32 फुट है।हालांकि कुछ-कुछ स्थानों पर चापाकल से पानी आना कम हो गया था।कुएं में पानी का लेवल नीचे चला गया है।नलजल योजना चालू रहने के कारण लोगो को कम परेशानी का सामना करना पड़ा।विभाग की ओर से साधारण चापाकल व आइएम टू व थ्री मरम्मत का काम समय से शुरू हो जाने के कारण पानी की समस्या नहीं हुई है। जेई ने बताया कि बिहारशरीफ पीएचईडी प्रमंडल अंतर्गत हरनौत सहित कुल 11 प्रखंड है। जिसमें पीएचईडी विभाग एवं जिला परिषद सदस्य द्वारा दिए गए तकरिबन 29 सौ से ज्यादा चापाकल(आइएम टू व थ्री चापाकल सहित ) को विशेष चापाकल मरम्मती अभियान के तहत आंशिक रूप से खराब चापाकलों को दुरुस्त किया गया।हालांकि विभाग द्वारा दी जा रही चापकलों की संख्या शायद ही धरातल पर दिखाई दे रहा होगा।प्रखंड के कितने गांव-टोला में ये नहीं पता चलता है कि ये निजी चापाकल है या सरकारी चापाकल ( हैडपम्प)। क्योंकि वहां पर न कोई बोर्ड और न हीं विभाग का कोई लोगो(LOGO) लगा रहता है।
जेई ने कहा कि अगर इसी तरह समय समय पर पानी होता रहा तो भूजल स्तर में गिरावट होने की संभावना कम हो जाएगा।कनिय अभियंता ने कहा कि विभाग अभी भी पानी को लेकर प्रत्येक दिन सभी संवेदक से बात कर जानकारी ली जा रही है। अगर कहीं कोई दिक्कत होता है, तो विभाग के अभियंता व संवेदक उसका समाधान तेजी में कर रहे हैं।
हरिओम की रिपोर्ट
