वैश्विक सहभागिता और ‘जिम्मेदार ज्ञान’ की अवधारणा के साथ सम्पन्न हुआ नालंदा विश्वविद्यालय का तृतीय स्नातकोत्सव समारोह…

ख़बरें टी वी : पिछले 16 वर्षो से ख़बर में सर्वश्रेष्ठ.. ख़बरें टी वी ” आप सब की आवाज ” …आप या आपके आसपास की खबरों के लिए हमारे इस नंबर पर खबर को व्हाट्सएप पर शेयर करें… ई. शिव कुमार, “ई. राज” -9334598481.
.. हमारी मुहिम .. नशा मुक्त हर घर .. बच्चे और नवयुवक ड्रग्स छोड़ें .. जीवन बचाएं, जीवन अनमोल है .. नशा करने वाले संगति से बचे ..
… हमारे प्लेटफार्म पर गूगल द्वारा प्रसारित विज्ञापन का हमारे चैनल के द्वारा कोई निजी परामर्श नहीं है, वह स्वतः प्रसारित होता है …
#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार | 19 मई 2026: नालंदा विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह (स्नातकोत्सव) आज विश्वविद्यालय परिसर स्थित नव-निर्मित 2000-सीटर ‘विश्वामित्रालय’ सभागार में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन वैश्विक शैक्षणिक सहयोग, नवाचार और ज्ञान आधारित भविष्य की दिशा में विश्वविद्यालय की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता नजर आया।
भारत के प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) की विशेष एवं गरिमामयी उपस्थिति रही, जबकि विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव (ईस्ट) श्री रुद्रेंद्र टंडन विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर विदेश मंत्रालय के नालंदा प्रभाग की संयुक्त सचिव सुश्री अर्चना नायर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद् एवं अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।
समारोह में 14 देशों के कुल 219 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। वियतनाम, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार सहित विभिन्न देशों के विद्यार्थियों की उपस्थिति ने विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को दर्शाया। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 08 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिए गए, जिनमें 07 छात्राएँ शामिल रहीं।

दीक्षांत समारोह के उपरांत मुख्य अतिथि डॉ. पी. के. मिश्रा द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय में ‘कौटिल्य सेंटर फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग’ का उद्घाटन भी किया गया।
अपने संबोधन में डॉ. पी. के. मिश्रा ने नालंदा को “केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत प्रतीक” बताते हुए 21वीं सदी में “जिम्मेदार ज्ञान” की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज मानवता के पास अभूतपूर्व तकनीकी क्षमताएँ हैं, किंतु सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि “ज्ञान, विवेक, नैतिकता, करुणा और मानवीय उत्तरदायित्व से जुड़ा रहे।”
डॉ. मिश्रा ने कहा, “नालंदा की कहानी केवल अतीत की कहानी नहीं है, बल्कि भविष्य की भी कहानी है” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नालंदा का पुनरुद्धार भारत की उस मूल भावना को अभिव्यक्त करता है, जिसमें उदारता, बहुलतावाद, संवाद और जिज्ञासा को मानवता के भविष्य के लिए अनिवार्य मूल्य माना गया है।
अपने उद्बोधन में बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने नालंदा को “एक सभ्यतागत पारिस्थितिकी तंत्र” बताते हुए कहा कि इसने भारत को एशिया से विचार, ज्ञान और आध्यात्मिक विमर्श के माध्यम से जोड़ा। उन्होंने कहा कि नालंदा का पुनरुत्थान “एक सभ्यतागत विचार की पुनर्प्राप्ति” है।
राज्यपाल ने ‘नालंदा कॉरिडोर’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा, बोधगया, राजगीर, वैशाली और विक्रमशिला को जोड़ने वाली यह जीवंत सांस्कृतिक भूगोल ज्ञान, नैतिकता और आध्यात्मिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा, “जहाँ प्राचीन नालंदा मानवता की ज्ञान-खोज का प्रतीक था, वहीं नया नालंदा मानवता की विवेक-खोज का प्रतीक बनना चाहिए।”

इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय की पुनरुत्थान यात्रा और उसके भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अब “अधिक सुदृढ़ीकरण और तीव्र प्रगति” के चरण में प्रवेश कर चुका है, जहाँ अकादमिक उत्कृष्टता, वैश्विक सहभागिता और बौद्धिक नवाचार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
प्रो. चतुर्वेदी ने घोषणा की कि आगामी शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी स्टडीज, डाटा साइंस एंड आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस जैसे नए पाठ्यक्रम प्रारंभ करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगस्त 2026 से “नालंदा स्पिरिट” नामक एक नया पाठ्यक्रम भी आरंभ किया जाएगा।
कुलपति ने कहा, “नालंदा केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि एक जीवंत भावना है।” उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय गैर-पश्चिमी ज्ञान परंपराओं, तुलनात्मक सभ्यता अध्ययन, पर्यावरणीय चिंतन और एशियाई ज्ञान प्रणालियों पर आधारित वैश्विक संवाद का अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
समारोह का समापन 21वीं सदी के लिए नालंदा विश्वविद्यालय को ज्ञान, संवाद, सतत विकास और जिम्मेदार बौद्धिक नेतृत्व के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ हुआ।
