सिनेमा की सफलता का पैमाना बॉक्स ऑफिस नहीं, नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल में अमोल पालेकर..

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#ख़बरें Tv: नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक विशेष सत्र में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर, उनकी धर्मपत्नी लेखिका संध्या गोखले तथा फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज के बीच रोचक संवाद हुआ। इस सत्र में सिनेमा, फिल्म आलोचना और रचनात्मक अनुभवों के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।
संवाद के दौरान अमोल पालेकर ने अपनी लिखी पुस्तक और अपने लंबे फिल्मी अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता का आकलन केवल उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन या आर्थिक कमाई से नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, एक फिल्म का वास्तविक मूल्य उसके विषय, संवेदनशीलता, सामाजिक प्रभाव और दर्शकों के मन पर पड़ने वाले स्थायी असर से तय होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि एक फिल्म समीक्षक का काम केवल यह कहना नहीं होता कि फिल्म हिट है या फ्लॉप, बल्कि यह समझना और समझाना होता है कि वह फिल्म अपने समय और समाज से किस प्रकार संवाद स्थापित करती है।
सत्र के दौरान दर्शकों के साथ भी खुलकर संवाद हुआ, जिसमें अमोल पालेकर ने अपनी फिल्मों और अभिनय यात्रा से जुड़े कई रोचक अनुभव साझा किए। इस आत्मीय बातचीत ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम के समापन पर पटना कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित लाइव पेंटिंग सत्र में बनाई गई एक विशेष कलाकृति अमोल पालेकर को भेंट की गई। इसके साथ ही उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और नालंदा की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती स्थानीय कलाकारों द्वारा मिट्टी से निर्मित एक प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।
इस सत्र ने सिनेमा, कला और समाज के गहरे संबंधों को उजागर करते हुए साहित्यिक महोत्सव को और भी सार्थक बना दिया।
