नई दिशा परिवार के तत्त्वावधान में आयोजित समारोह में 31 गुरुओं का हुआ सम्मान, स्मरण किए गए महान शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ.राधाकृष्णन…

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#ख़बरें Tv: पटना,03 सितम्बर। भारत अपनी महान ज्ञान-परंपरा के कारण ही विश्व-गुरु था। वह इसलिए था कि यह देश ज्ञान और आध्यात्मिक-चिंतन में शीर्ष पर था। विश्वविद्यालय की अवधारणा भारत की देन है। शिक्षक ही छात्र-छात्राओं को गढ़ते हैं और उन्हें समाज के मूल्यवान नागरिक बनाते हैं। नया समाज गढ़ने वाले ऐसे आदरणीय शिक्षकों का सम्मान, वस्तुतः भारत की महान परंपरा और संस्कृति का ही समादर है। चरित्रवान और गुणी शिक्षक ही, चरित्रवान और गुणवान नागरिक तैयार
ये बातें गुरुवार को, पटनासिटी की सांस्कृतिक-संस्था ‘नई दिशा परिवार’ के तत्त्वावधान में, महेंद्रू स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सभागार में आयोजित शिक्षक-सम्मान-समारोह का उद्घाटन करते हुए, बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि यदि परमहंस रामकृष्ण न होते तो श्री नरेंद्र, स्वामी विवेकानन्द नहीं होते। चाणक्य न होते तो चंद्रगुप्त भी न होते। युवाओं की जिज्ञासाओं को शांत करने और उनके मार्ग-दर्शन का महान कर्तव्य शिक्षकों का ही है
समारोह के मुख्य अतिथि और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २०४७ तक जिस विश्व-गुरु भारत का स्वप्न देखा है, उसे शिक्षक ही पूरा कर सकते हैं
अपने अध्यक्षीय उद्गार में साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान-परंपरा, ‘गुरु-ज्ञान’ आधारित है। शिक्षा विशाल परिसरों में बने बड़े-बड़े भवन अथवा दीवारें या वातानुकूलित कक्षाएँ नहीं, योग्य और निष्ठावान आचार्यों से प्राप्त होती है। आज शैक्षणिक केंद्रों को पाँच-सितारा होटेल बनाने के उपक्रम हो रहे हैं, जहाँ व्यवसाय तो हो सकते हैं, संस्कार देने वाली शिक्षा नहीं मिल सकती। इसीलिए आज के विद्यार्थी ‘मनुष्य’ होने के स्थान पर ‘धन-मशीन’ बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक होना, संसार में कुछ भी होने से बड़ा होना है। किसी देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री होने से भी बड़ा। क्योंकि इन्हें भी पैर छूकर प्रणाम केवल उनके परिजन अथवा वे करते हैं, जिन्हें उनसे किसी प्रकार के लाभ की आशा होती है। किंतु एक शिक्षक को पैर छूकर प्रणाम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी करते हैं। शिक्षकों को यह स्मरण रखना होगा कि वे देश के भविष्य-निर्माता हैं
पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो के सी सिन्हा, पटना की महापौर सीता साहू, सुप्रसिद्ध चिकित्सक डा दिवाकर तेजस्वी, शिव प्रसाद मोदी और कमल नयन श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत संस्था के संरक्षक राजेश वल्लभ यादव ने तथा मंच का संचालन संस्था के सचिव राजेश राज ने किया
इस अवसर पर बिहार के 31 शिक्षकों का सम्मान किया गया, जिनमें प्रो डा रमाकर झा (बिहार विशेष शिक्षा सेवा सम्मान), प्रो एन एस मौर्य,प्रो एस एस मिश्रा, प्रो कामिनी सिन्हा,उमेश सिंह, कुमार देवांशु, श्री अरविन्द, परितोष कुमार, मनोज कुमार, मिलिन्द महिपाल, रजनीश सिन्हा,उर्मिला कुमारी, विष्णु कुमार साह, आकाश जैन, मुकेश कुमार वर्मा, कुमार पंकज सिन्हा, गायत्री देवी, डा अंजलि शर्मा, डा अनुश्री बर्मन, दीपक कुमार, आदित्य कुमार, राकेश कुमार, प्रेम कुमार (सभी ‘बिहार शिक्षा-रत्न’ सम्मान), डा मुख़्तार सिंह, डा सत्येंद्र शर्मा, प्रो सुधा सिन्हा, डा कुमार अभिनव, अजीत सिंह (सभी ‘बिहार गौरव’ सम्मान ), उज्ज्वल राज, युवराज राज, अमृता कुमारी (बिहार प्रतिभा सम्मान), गायिका मासूम सिंह (बिहार कला-रत्न सम्मान) के नाम सम्मिलित हैं। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के पूर्व प्राध्यापक प्रो संतोष कुमार को लाइफ़ टाईम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। समाज-सेवा के लिए डा प्रेम कुमार तथा अभिषेक श्रीवास्तव को भी सम्मानित किया गया
