नये श्रम कानून मजदूरों को मजबूत नहीं बल्कि मजबूर बना रहा है। :- ईसीआरकेयू

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#ख़बरें Tv: 12 फरवरी गुरुवार को आज देशभर में कुछ ट्रेड यूनियन के द्वारा केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे श्रम कानून के चार लेबर कोड को वापस करने के मांग को लेकर हड़ताल किया जा रहा है। इसके अंतर्गत हरनौत रेल कारखाना में ईसीआरकेयू के बैनर तले हड़ताल के नैतिक समर्थन में कर्मचारियों द्वारा ईसीआरकेयू के शाखा अध्यक्ष महेश महतो और शाखा सचिव पूर्णानन्द मिश्र के नेतृत्व में गेट मीटिंग किया गया। इस अवसर पर शाखा सचिव पूर्णानंद मिश्र ने बताया कि पहले 29 लेबर कोड कार्यरत था। केंद्र सरकार इन 29 लेबर कोड को बदलकर कर 4 लेबर कोड ला रही है। सरकार द्वारा मीडिया में यह प्रचारित करवाया जा रहा है कि यह लेबर कोड कर्मचारियों के पक्ष में है। परंतु वास्तविकता यह है कि इन चारों लेबर कोड के द्वारा केंद्र सरकार कंपनी वालों, औद्योगिक घरानों और सरकारी उपक्रमों को बंधुआ मजदूर सौंप रही है। जो भी कर्मचारी और मजदूर है, उनके विरोध के अधिकार को इन कानून के द्वारा समाप्त कर उनके आवाज को दबाया जा रहा है। इस कानून के अंदर हड़ताल को बहुत ही जटिल कर दिया गया है, जो कि मजदूरों के लिए अपने हक की लड़ाई के लिए सबसे मजबूत हथियार होता है। पहले नियम यह था कि 100 से ज्यादा कर्मचारी वाले कंपनी को कर्मचारियों के छंटनी के लिए सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती थी। नई लेबर कोड में इसका दायरा बढ़ाकर 300 कर्मचारी वाले कंपनी में बदल दिया गया है। इसका असर छोटे-छोटे कंपनियों में काम कर रहे कम मजदूरी वाले मजदूरों पर सीधे-सीधे पड़ रहा है। कोई कर्मचारी यदि शोषण के खिलाफ आवाज उठाएं तो उसको अगले दिन से बिना नोटिस के घर बैठा दिया जाएगा। इस प्रकार सरकार औद्योगिक घरानों के लिए एक मजबूत मजदूर नहीं बल्कि एक मजबूर मजदूर बनाकर सौंप रही है। सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी तय करने का भी तरीका स्पष्ट और श्रम हितों के अनुरूप नहीं है। इन कानून से मजदूरों का सामाजिक सुरक्षा भी प्रभावित हो रहा है। इससे मजदूरों को मिलने वाला पीएफ, बीमा, स्वास्थ्य अनुदान, छुट्टी तथा अन्य लाभ प्रभावित हो रहा है।
श्री मिश्र ने बताया कि आज कर्मचारी हरनौत कारखाना के अंदर हड़ताल पर नहीं है। एआईआरएफ और ईसीआरकेयू के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार आज हड़ताल पर गए यूनियन का केवल नैतिक समर्थन किया जा रहा है। नैतिक समर्थन के अंतर्गत हरनौत रेल कारखाना में उत्पादन प्रभावित किए बिना भोजनावकाश के समय टाइम ऑफिस के पास गेट मीटिंग, नारेबाजी और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया गया। यदि सरकार नहीं चेती, इन नए अप्रासंगिक श्रम कानून को वापस नहीं ली और टकराव का रास्ता अपनाई गई तो हरनौत के कर्मचारी भी अपने केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में हड़ताल के लिए मजबूर होंगे। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष मनोज मिश्र, उपाध्यक्ष प्रमोद गौतम, रंजीत कुमार, संयुक्त सचिव राकेश रंजन, सहायक सचिव विपिन कुमार, संगठन सचिव गिरिजा प्रसाद, सीसीएम बासुकीनाथ उपाध्याय, शाखा पार्षद मृत्युंजय चौबे, विनय कुमार, विपिन प्रसाद सहित सैकड़ो कर्मचारी एक्ट अप्रेंटिस के प्रशिक्षु तथा प्राइवेट मजदूर उपस्थित थे। हड़ताल के संबंध में सहायक कार्मिक अधिकारी संजीव कुमार त्रिवेदी से वार्ता करने पर उन्होंने बताया कि आज वह हरनौत में नहीं थे। हरनौत में कर्मचारियों द्वारा आज कोई हड़ताल नहीं किया गया है। ईसीआरकेयू के द्वारा काम प्रभावित किए बिना भोजनावकाश के समय गेट मीटिंग किया गया। इस गेट मीटिंग पर आरपीएफ और डब्ल्यू आई के द्वारा नजर रखा जा रहा था। गेट मीटिंग शांतिपूर्ण संपन्न हो गया।
