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#bihar: नालंदा में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का शुभारंभ, जिला पदाधिकारी ने बच्चों को दी दवा की खुराक…

Bykhabretv-raj

Feb 10, 2026

 

 

 

 

 

 

नालंदा में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का शुभारंभ, जिला पदाधिकारी ने बच्चों को दी दवा की खुराक…

 

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: आज दिनांक 10 फरवरी 2026 को श्री कुंदन कुमार, जिला पदाधिकारी, नालंदा द्वारा जिलेभर में फाइलेरिया उन्मूलन हेतु मॉडल सदर अस्पताल बिहार शरीफ में स्वयं बच्चों को फाइलेरिया से बचाव हेतु निर्धारित दवा की खुराक खिलाकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया ।

जिला पदाधिकारी महोदय ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से रोके जाने योग्य बीमारी है। इसके उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें सभी पात्र व्यक्तियों को दवा का सेवन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे किसी भी भ्रांति में न पड़ें और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी जा रही दवाओं का सेवन अवश्य करें।

जिलेभर में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत दिनांक 10.02.2026 से 24 फरवरी 2026 तक एमडीए कार्यक्रम नालंदा जिला के 11 प्रखंडों (बिहारशरीफ शहरी क्षेत्र , बिंद, चंडी,एकंगरसराय ,इस्लामपुर,
नूरसराय, परवलपुर, रहुई, सरमेरा, सिलाव एवं थरथरी प्रखंड में प्रारंभ किया गया है ।

प्रारम्भ तिथि: 10 फ़रवरी 2026
से 24 फरवरी 2026 तक (घर घर कार्यक्रम 14 दिनों तक,) /दिनांक 25 फरवरी से 27 फरवरी तक बूथ कैंप स्कूल, कार्यालय, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, बस स्टैंड आदि स्थानों पर कार्यक्रम 03 दिनों तक)
11 फरवरी 2026 से मेगा कैंप आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगाए जाएंगे ।

जिलेभर में कुल लाभार्थियों की संख्या – 1812203
कुल प्रवेक्षक की संख्या – 82
कुल टीमों की संख्या – 847
कुल टीम के सदस्यों की संख्या – 1694
कुल अनुमानित जीविका के सदस्यों की संख्या ( मेगा कैंप 11 feb 2026) – 158728

कुल आयोजित होने बाले मेगा कैम्प (11 Feb. 2026) बुथों की संख्या (लगभग) – 561

फाइलेरिया बीमारी जो कि हाथीपांव के नाम से जाना जाता है, मच्छर के काटने से होती है । यह दिव्यांगता करने वाली विश्व की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी है, जिसके कारण इसे काफी गंभीर माना जाता है, यह शरीर के हाथ,पैर, स्तन और अंडकोष यानी हाइड्रोसिल को प्रभावित करता है। इस बीमारी का पता चलने में 5 से 15 वर्ष तक लग जाते हैं, इस बीमारी से बचाव के लिए साल में सिर्फ एक बार फाइलेरिया रोधी दवा से ही बचाव संभव है।
यह दवा दो वर्ष से छोटे बच्चों, गर्भवती महिला एवं अत्यधिक बीमारी बीमार वयस्क को छोड़कर सभी लोगों को खाना है।

भरपेट नाश्ता एवं खाना खाने के बाद ही इस दवा का सेवन करना है इसका विशेष ख्याल रखना है।

यह दावा आशा कार्यकर्ता, एएनएम के द्वारा घर-घर जाकर खिलाया जा रहा है ।

कुछ लोगों को इन दवाओं के मामूली प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं जो कि शुभ संकेत है। शरीर के अंदर फाइलेरिया के कीड़े मरने के कारण सरदर्द, उल्टी, चक्कर , बुखार इत्यादि हो सकते हैं। इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है । अगर ऐसा होता है तो चिंता करने के बजाय इस बात की खुशी मनाएं कि आपको इस खतरनाक बीमारी से मुक्ति मिल रही है ।

जिलाधिकारी महोदय ने सिविल सर्जन को निर्देश देते हुए कहा कि प्रभावित चिन्हित व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए एम्बुलेंस एवं अस्पताल में उपचार ससमय उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे ।
इस बीमारी के बचाव हेतु दो प्रकार की दवा DEC एवं ALBENDAZOLE ही खिलाई जा रही है ।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग (महादलित विकास मिशन) विभाग की महत्वपूर्ण गतिविधियों के तहत
विकास मित्र, महादलित टोले में एम.डी.ए. कार्यक्रम के संबंध में प्रचार-प्रसार करेंगे एवं लोगों को दवा खाने हेतु प्रेरित करेंगे ।

10 फरबरी 2026 से दवा खिलाने में ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर (आशा एवं वॉलिन्टियर) को सहयोग भी करेंगे।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, जिला प्रोग्राम प्रबंधक जिला स्वास्थ्य समिति, नालंदा, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारी आदि उपस्थित थे।