नालंदा विश्वविद्यालय में 25वें IASSI वार्षिक सम्मेलन में विकास के प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श…
HARI University और द यूनिवर्सिटी ऑफ़ द वेस्ट इंडीज के साथ शैक्षणिक साझेदारियाँ, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम..

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार | मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026: नालंदा विश्वविद्यालय के राजगीर परिसर में 25 से 28 अक्टूबर 2026 तक ‘भारतीय सामाजिक विज्ञान संस्थान संघ’ (आईएएसएसआई) का 25वाँ वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश के विद्वान, शोधकर्ता और नीति-निर्माता आज के समय के विकास की चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं। इस सम्मेलन में मुख्य रूप से भारतीय पद्धतियों, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, पोषण, संस्कृति और साक्ष्य-आधारित नीतियों जैसे विषयों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया जा रहा है।
सम्मेलन के अवसर पर नालंदा विश्वविद्यालय ने हैदराबाद स्थित HARI University और वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय (द यूनिवर्सिटी ऑफ़ द वेस्ट इंडीज – UWI), केव हिल परिसर के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से शैक्षणिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय ज्ञान-विनिमय के नए अवसरों को प्रोत्साहन मिलेगा।
HARI University (हार्टफूलनेस अकादमी ऑफ़ रिसर्च एंड इनोवेशन) के साथ समझौता ज्ञापन पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और HARI University के कुलपति प्रो. नरसिरेड्डी मालगिरेड्डी ने हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी के अंतर्गत संयुक्त शोध-निर्देशन, शिक्षण कार्यक्रमों, पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान, शैक्षणिक सम्मेलनों एवं प्रकाशनों तथा संकाय सदस्यों, शोध अध्येताओं और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें विभिन्न विषयों से संबंधित शैक्षणिक साहित्य और संसाधनों को साझा करने की व्यवस्था भी शामिल है।
वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय के केव हिल परिसर के साथ समझौता ज्ञापन पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और केव हिल परिसर के प्रो-वाइस चांसलर एवं प्रिंसिपल प्रोफेसर आर. क्लाइव लैंडिस ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते के माध्यम से अंतर्विषयी अनुसंधान, शिक्षण, मानविकी, सांस्कृतिक अध्ययन तथा रचनात्मक एवं प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्रों में सहयोग के अवसर विकसित होंगे। इसके साथ ही संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान तथा संयुक्त शैक्षणिक पहलों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव भी उपस्थित थे।
वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल में केव हिल परिसर के संस्कृति, रचनात्मक एवं प्रदर्शन कला संकाय के डीन प्रोफेसर डेविड अकोम्बो तथा मानविकी एवं शिक्षा संकाय के उप-डीन (आउटरीच) श्री टेरेंस इनिस शामिल थे।
ये साझेदारियाँ अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक नेटवर्क को सुदृढ़ करने, अंतर्विषयी अध्ययन एवं अनुसंधान को आगे बढ़ाने तथा विभिन्न क्षेत्रों के बीच बौद्धिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्रोत्साहित करने के प्रति नालंदा विश्वविद्यालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
सामाजिक विज्ञान के लिए भारतीय पद्धतियों पर विशेष पैनल की अध्यक्षता नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं IASSI के अध्यक्ष प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने की। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं थुगलक के संपादक श्री एस. गुरुमूर्ति ने मुख्य वक्तव्य दिया। पैनल में भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव श्री सौरभ गर्ग, IAS तथा IIM अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर प्रो. रवींद्र एच. ढोलकिया ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
अपने संबोधन में श्री गुरुमूर्ति ने भारतीय समाज को उसके ऐतिहासिक अनुभवों, सांस्कृतिक परंपराओं और वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझने के महत्त्व पर बल दिया। सामाजिक संरचनाओं, ज्ञान के हस्तांतरण, पारिवारिक व्यवस्थाओं, खाद्य सुरक्षा और सामुदायिक जीवन के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए उन्होंने सामाजिक विज्ञान के वैचारिक ढाँचों के विकास में देशज अनुभवों को अधिक महत्त्व देने की आवश्यकता बताई। उनके संबोधन में इस बात पर जोर दिया गया कि दैनिक जीवन की प्रथाओं और सामुदायिक संस्थाओं में निहित ज्ञान समाज एवं विकास की समकालीन समझ को समृद्ध कर सकता है।
तरलोक सिंह स्मृति व्याख्यान भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने “विकास के लिए आँकड़े: विकसित भारत @2047 के लिए साक्ष्य-आधार की सुदृढ़ता” विषय पर दिया। डॉ. गर्ग ने सामाजिक-आर्थिक बदलावों को समझने और सार्वजनिक नीतियों को दिशा देने में विश्वसनीय आधिकारिक आँकड़ों, समयबद्ध एवं सूक्ष्म स्तर के डेटा, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ अनुभवजन्य अनुसंधान के महत्त्व को रेखांकित किया।
उन्होंने भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की, जिनमें प्रशासनिक एवं वैकल्पिक डेटा स्रोतों का उपयोग, सर्वेक्षण पद्धतियों में सुधार और सांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करना शामिल है। आँकड़ों और सामाजिक विज्ञान अनुसंधान के बीच संबंध स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि विश्वसनीय आँकड़े विकास संबंधी कमियों की पहचान करने में मदद करते हैं, जबकि अनुसंधान उन कमियों को समझने के लिए आवश्यक विश्लेषणात्मक दृष्टि प्रदान करता है। डॉ. गर्ग के शब्दों में, “सांख्यिकीय प्रणाली का कार्य केवल मापन तक सीमित नहीं होना चाहिए; उसे यह समझने में भी हमारी सहायता करनी चाहिए कि देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।”
इस व्याख्यान में समावेशी विकास तथा विकसित भारत @2047 के दीर्घकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए साक्ष्य-आधार को सुदृढ़ करने के महत्त्व को रेखांकित किया गया।
सम्मेलन में भारत की विकास प्राथमिकताओं से जुड़े विभिन्न पूर्ण सत्रों और अन्य अकादमिक सत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण, संस्कृति और विकास, सार्वजनिक नीति तथा सामाजिक परिवर्तन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इन चर्चाओं में अंतर्विषयी दृष्टिकोण, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, संस्थागत प्रभावशीलता, सामुदायिक कल्याण और भारत की विविध सामाजिक वास्तविकताओं को समझने के महत्त्व पर बल दिया गया।
चार दिवसीय इस सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, सार्वजनिक नीति और सामाजिक परिवर्तन जैसे विषयों पर गहन संवाद हुआ। सम्मेलन का औपचारिक समापन 28 अक्टूबर 2026 को होगा, जिसमें बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन मुख्य अतिथि के रूप में समापन संबोधन देंगे।
