वैज्ञानिक सोच के प्रसार में जुटे तीन शिक्षक सम्मानित…

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#ख़बरें Tv: प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा छत्तीसगढ़ द्वारा माता बमलेश्वरी अतिथि गृह, डोंगरगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम में समाज में वैज्ञानिक सोच, तर्कशीलता, अंधविश्वास उन्मूलन एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार के लिए जिले के तीन शिक्षकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में प्राथमिक विद्यालय बेलदरिया के प्रधान शिक्षक रोहित कुमार, उर्दू प्राथमिक विद्यालय कोहनासराय के विशिष्ट शिक्षक मो. नजमुद्दीन एवं शीतला +2 उच्च विद्यालय मघड़ा के शिक्षक डॉ. मो. एजाज अहमद शामिल हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान शिक्षक रोहित कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण की शुरुआत घर और विद्यालय से होती है। बच्चों को डराने या तत्काल संतुष्ट करने के लिए कई बार हम ऐसे उदाहरण दे देते हैं, जिनका विज्ञान से कोई संबंध नहीं होता। यही बातें धीरे-धीरे बच्चों के मस्तिष्क में बैठ जाती हैं और अंधविश्वास को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि हमारी ज्ञानेंद्रियां भी हर समय सही जानकारी नहीं देतीं और कई बार भ्रमित कर सकती हैं। इसलिए किसी भी बात को प्रमाण और तर्क की कसौटी पर परखने के बाद ही उस पर विश्वास करना चाहिए।
शिक्षक मो. नजमुद्दीन ने कहा कि विज्ञान हमें तर्क करना, सवाल पूछना और किसी घटना के पीछे का कारण जानना सिखाता है, जबकि अंधविश्वास प्रश्न करने की स्वतंत्रता को रोकता है। विज्ञान के प्रसार के साथ अंधविश्वास, जादू-टोना, डायन प्रथा और झाड़-फूंक जैसी कुप्रथाएं धीरे-धीरे सिमट रही हैं। डॉ. मो. एजाज अहमद ने कहा कि प्रत्येक घटनाक्रम के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण होता है। जहां लोगों को जानकारी नहीं होती, वहां पाखंडी लोग भ्रम पैदा कर उसका फायदा उठाते हैं और इसे अपना रोजगार बना लेते हैं। ऐसे में वैज्ञानिक चेतना का प्रसार समाज को भ्रम और अंधविश्वास से मुक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों के समक्ष विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिक तथ्यों और तर्कों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। जलते हुए कपूर को खाने का भ्रम, सूखे नारियल में पानी डालने पर आग लगने की प्रक्रिया, कागज पर पानी डालने से छिपा लेख दिखाई देना, तांत्रिक सामग्री द्वारा सवालों के सही जवाब देने का भ्रम, हाथ में दिए गए चावल का रंग बदलना, आत्मा को मुक्त करने जैसी कथित घटनाएं तथा ज्ञानेंद्रियों के भ्रमित होने का प्रदर्शन किया गया। प्रत्येक गतिविधि के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को भी समझाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों, विशेषकर बच्चों और युवाओं में तर्कशीलता, वैज्ञानिक सोच एवं सवाल पूछने की प्रवृत्ति विकसित करना तथा अंधविश्वास के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा।
