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#bihar: नालंदा विश्वविद्यालय में गिरमिटिया विरासत पर दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मंथन का शुभारम्भ..

Bykhabretv-raj

Mar 28, 2026

 

 

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय में गिरमिटिया विरासत पर दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मंथन का शुभारम्भ…

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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#ख़बरें Tv: राजगीर, नालंदा, बिहार (28 मार्च, 2026): नालंदा विश्वविद्यालय ने आज से “गिरमिटिया पहचान का पुनर्स्मरण: अतीत, वर्तमान और भविष्य” विषय पर दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हाइब्रिड माध्यम से शुभारंभ किया। इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद (ARSP) तथा डायस्पोरा रिसर्च एंड रिसोर्स सेंटर द्वारा, विदेश मंत्रालय के सहयोग से, नालंदा विश्वविद्यालय के साथ मिलकर किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र का प्रारंभ ARSP के महासचिव श्याम परांडे के स्वागत वक्तव्य से हुआ, जिसमें उन्होंने गिरमिटिया विरासत से पुनः जुड़ने तथा भारतीय प्रवासी समुदाय पर वैश्विक शैक्षणिक संवाद को सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके पश्चात ARSP के सचिव गोपाल अरोड़ा ने सम्मेलन की विषय-वस्तु प्रस्तुत करते हुए गिरमिटिया पहचान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक आयामों पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि, गुयाना गणराज्य के उच्चायुक्त महामहिम धरम कुमार सीराज ने गिरमिटिया श्रमिकों की विरासत और उनके वंशजों के समकालीन समाजों में महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने गुयाना को विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण बताया।

मुख्य वक्ता के रूप में अजय दुबे, पूर्व रेक्टर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने भारतीय प्रवासी समुदाय में नेतृत्व और विविधता पर विचार व्यक्त करते हुए बताया कि गिरमिटिया वंशज आज वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे हैं।

बिमान प्रसाद (ऑनलाइन), फिजी के पूर्व उप प्रधानमंत्री, ने गिरमिटिया समुदाय के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके इतिहास और पहचान पर निरंतर शैक्षणिक एवं संस्थागत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया।

त्रिनिदाद और टोबैगो से चंद्रदत्त सिंह (ऑनलाइन) ने गिरमिटिया समुदाय के प्रति भारत की बदलती सहभागिता पर विचार साझा करते हुए सांस्कृतिक पुनर्संपर्क, संस्थागत सहयोग और विरासत संरक्षण के प्रयासों को रेखांकित किया।

प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार से सम्मानित सरिता बूधू ने नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार और उसके प्रतीकात्मक महत्व पर विचार रखते हुए इसे प्रवासन और पहचान के व्यापक विमर्श से जोड़ा।

ARSP के अध्यक्ष विनोद कुमार (ऑनलाइन) ने पीढ़ियों के बीच पहचान के प्रश्न पर विचार करते हुए पूर्वजों के त्याग और मूल्यों के हस्तांतरण को रेखांकित किया।

इस सत्र की अध्यक्षता नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने की। उन्होंने गिरमिटिया इतिहास और पहचान पर गहन शोध की आवश्यकता पर बल देते हुए तकनीक के माध्यम से वंशावली संबंधों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

यह सम्मेलन विश्वभर में फैले गिरमिटिया समुदाय के ऐतिहासिक विकास, बदलती पहचान और भविष्य की दिशाओं पर विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इसमें विद्वान, राजनयिक, नीति-निर्माता एवं सामुदायिक प्रतिनिधि सहभागी हो रहे हैं।

सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न विषयगत सत्रों के माध्यम से गिरमिटिया इतिहास, पहचान, सांस्कृतिक निरंतरता और समकालीन चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा जारी रहेगी।